गोरखपुर शहर में चलने वाले सीएनजी ऑटो का रंग हरा है। ऐसे में जिम्मेदारों को चकमा देने के लिए डीजल ऑटो चालकों ने अपनी ऑटो के रंग ही बदल दिया है। डीजल ऑटो काले रंग के होते हैं, लेकिन कई डीजल ऑटो चालकों ने सीएनजी ऑटो की तरह दिखाने के लिए अपने ऑटो का रंग बदलकर हरा करा लिया है।
उड़ रही धूल, अधिकारी अपनी जिम्मेदारी गए हैं भूल
शहर में सबसे ज्यादा धूल पैडलेगंज से लेकर नौसड़ तक सिक्सलेन रोड पर उड़ रही है। टीपी नगर से देवरिया बाईपास तिराहा से आगे तक फ्लाईओवर बन रहा है। यहां मंगलवार की दोपहर 02.30 बजे वाहनों के आने-जाने पर खूब धूल उड़ रही है। टीपीनगर चौराहे पर मौजूद यातायात पुलिसकर्मी ने बताया कि प्रदूषण के कारण मास्क पहनना पड़ रहा है। इससे आगे जाने पर फलमंडी के पास दोनों ओर मिट्टी का ढेर लगा हुआ था। यहां से वाहनों के गुजरने पर धूल उड़ती रही।
इसे भी पढ़ें: अब गोमतीनगर में ब्लॉक के चलते प्रभावित रहेंगी ट्रेनें, इनका बदला रूट
गोरखपुर में प्रदूषण के कारण मास्क लगाए पुलिसकर्मी।
- फोटो : अमर उजाला।
तारामंडल क्षेत्र में नया सवेरा से नई फोरलेन सड़क देवरिया बाईपास रोड तक और जीएसटी ऑफिस तक फोरलेन सड़क बन रही है। दोपहर 03.05 बजे इस रोड पर अंबेडकर पार्क से आगे सड़क की धूल को रोकने के लिए टैंकर से पानी का छिड़काव किया जा रहा था। टैंकर चला रहे चालक ने बताया कि धूल को रोकने लिए ठेकेदार की ओर से पानी गिरवाया जा रहा है। हालांकि देवरिया बाईपास फोरलेन रोड पर जंगल सिकरी तक निर्माण कार्य के दौरान प्रदूषण रोकने का कोई इंतजाम नहीं नजर आया।
एआरटीओ प्रशासन अरुण कुमार ने कहा कि डीजल ऑटो शहर में पूरी तरह से प्रतिबंधित है। अगर शहर में ये कहीं भी चलते मिले तो इन्हें सीज कर दिया जाएगा। दिवाली बाद अभियान चलाकर जांच की जाएगी। डीजल ऑटो चलते पाए गए तो सीज किया जाएगा।
इसे भी पढ़ें: दरवाजे पर बैठे बुजुर्ग पर चढ़ाई कार, तेज रफ्तार पिकअप ने बच्ची को रौंदा; दोनों की मौत
गोरखपुर शहर के अंदर डीजल वाला ऑटो।
- फोटो : अमर उजाला।
पर्यावरणविद् प्रो. गोविंद पांडेय ने बताया कि डीजल से चलने वाले वाहनों से नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। डीजल इंजन से निकलने वाले धुएं को काला, नीला और सफेद तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है। काला धुआं ईंधन के जलने से निकलता है। सफेद धुआं अधजले ईंधन और ठंडे इंजन से निकलता है। काला धुआं ही अत्यधिक प्रदूषणकारी कण व गैसों का उत्सर्जन करता है।
चेस्ट फिजिशियन डॉ. ऋषभ गोयल ने कहा कि धूल व धुएं के कण शरीर को हर प्रकार से नुकसान पहुंचाते हैं। इसकी एलर्जी की वजह से कुछ लोगों को सर्दी-जुकाम हो जाता है, जो बार-बार परेशान करता है। धुआं फेफड़े को भी प्रभावित करता है। कोविड काल में मास्क पहनने के चलते एलर्जी के मामलों में कमी आई थी, लेकिन अब फिर लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे दिक्कत हो रही है।
इसे भी पढ़ें: नदी किनारे बनने लगीं वेदियां, घाट की जमीन कब्जाने वालों पर होगी कार्रवाई
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुनाल ने कहा कि प्रदूषण हृदय को भी प्रभावित करता है। दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में कई हृदय रोगी ऐसे हैं जो किसी न किसी प्रकार के प्रदूषण के चलते ही बीमार हुए हैं। आप स्वयं महसूस करिए कि अधिक धुआं वाली जगह पर जाने पर दम घुटने लगता है, तो वहीं धूल के कणों से खुजली होना सामान्य बात है। प्रदूषण हर तरह से शरीर को नुकसान पहुंचाता है।