गोरखपुर शहर के बीच से गुजरने वाले करीब 10 किलोमीटर लंबे गोड़धोइया नाले को 144 करोड़ रुपये की लागत से गोमती रिवर फ्रंट जैसा बनाया जाएगा। 9682 मीटर लंबे और 20 मीटर चौड़े इस नाले पर अभी 1900 से अधिक अतिक्रमण हैं, कुछ जगहों पर इसका वजूद ही गायब है। यह नाला शाहगंज स्थित महाकाली मंदिर से शुरू होकर रेलवे ब्रिज रामगढ़ताल में जाकर मिलता है।
जानकारी के मुताबिक नाला बन जाने से पानी की निकासी तेज होगी और शहर के लोगों को जलभराव से होने वाली परेशानियों से निजात मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद अधिकारियों की टीम नाला निर्माण के लिए तेजी से कवायद कर रही है। गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने लिडार सर्वे करने वाली कंपनी जियोनो से डीपीआर तैयार करा लिया है। आधे शहर का पानी गोड़धोइया नाले से होकर निकलता है।
नाले पर हुए अतिक्रमण तथा सिल्ट भर जाने से पानी की निकासी धीमी होती है, जिससे जलभराव की समस्या बनी रहती है। कुछ अतिक्रमण जलनिकासी के लिए नगर निगम ने हटाए थे, लेकिन अधिकतर स्थायी अतिक्रमण नहीं हटाए जा सके हैं। प्रशासन की टीम सर्वे कर रही है, जिसमें अतिक्रमण वाले स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है।
गोड़धोइया नाला एक नजर में
- कुल लागत-144.84 करोड़
- नाले की लंबाई-9682 मीटर
- नाले की चौड़ाई-20 मीटर
- गहराई-1.5 मीटर से 2.75 मीटर
- नाले की शुरुआत-शाहगंज स्थित माता महाकाली मंदिर से
- नाले का समापन- रामगढ़ताल रेलवे ब्रिज होगा अंतिम प्वाइंट
- डिजाइन-नाले की डिजाइन लिडार सर्वे के डाटा के आधार पर किया गया है। इससे ढलान की समस्या नहीं होगी और पानी की निकासी तेजी से होगी।