बकौल जीडीए उपाध्यक्ष, अलीगढ़ में नगर आयुक्त रहते हुए उन्होंने शहर को कचरा मुक्त बनाने के लिए जगह-जगह बनाए गए कूड़ा घर को बंद कर दिया था। कूड़ा एकत्रित करने के लिए डोर-टू डोर कूड़ा एकत्र करने पर जोर दिया। कूड़ा एकत्र करने के बाद उसे प्रोसेसिंग सेंटर लाया जाता और वहां कूड़ा कंप्रेस कर बड़े कूड़ा केंद्रों तक पहुंचाया जाता था।
शहर में कहीं भी कचरा नजर नहीं आता था। कूड़े से जैविक खाद भी बनाई जाती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पाकर वे बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। इससे उन्हें नई ऊर्जा मिली है जिसका कार्यक्षेत्र में संचार दिखाई पड़ेगा।
केंद्र सरकार की ओर से दो बार और पुरस्कार पा चुके हैं प्रेम रंजन
यह पहला मौका नहीं जब जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह को कोई बड़ा सम्मान मिला है। इसके पहले भी केंद्र सरकार की ओर से उन्हें दो बार पुरस्कार मिल चुके हैं। इससे पहले उन्नाव के मुख्य विकास अधिकारी रहते हुए 2019 में उन्हें पूरे देश में 28 में से दो पुरस्कार मिले थे। मनरेगा में रिकॉर्ड कार्यदिवस सृजित करने एवं एक साल में सबसे अधिक प्रधानमंत्री आवास का निर्माण पूर्ण कराने के लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया था।