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Exclusive: अवैध कॉलोनियां बसाने वालों पर जीडीए ने कसा शिकंजा, 113 लोगों को भेजा गया नोटिस

Tue, 09 Nov 2021 10:24 AM IST
vivek shukla अरूण चंद, गोरखपुर।

सार

किसानों से अनुबंध कर जमीन बेचने वाले 113 लोगों को जीडीए ने नोटिस भेजा। महायोजना-2031 तैयार होने तक जमीन पर निर्माण नहीं कराने का निर्देश भी दिया।
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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किसानों से अनुबंध कर उनकी जमीन अपने नाम से बेचने वालों पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने शिकंजा कस दिया है। जीडीए ने 113 ऐसे जमीन कारोबारियों को नोटिस देकर महायोजना-2031 तैयार होने तक निर्माण नहीं कराने का निर्देश दिया है। साथ ही जमीन के जरूरी दस्तावेज भी तलब किए हैं। इस सख्ती के बाद सैकड़ों जमीन कारोबारियों की 300 एकड़ से अधिक जमीन पर फिलहाल कोई निर्माण नहीं हो पाएगा। इससे अवैध कॉलोनियां बसने पर अंकुश लगेगा और किसानों को उनकी जमीन की उचित कीमत मिल सकेगी।  

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दरअसल, महायोजना-2031 से बड़े और नामी रियल इस्टेट कारोबारियों को ज्यादा समस्या नहीं है। ऐसे लोग तो जरूरी सुविधाएं विकसित कर और ले-आउट पास कराने के साथ जरूरी औपचारिकताएं पूरी करके प्लाट बेचते हैं। प्रभावित वैसे लोग हो रहे हैं जो काश्तकारों से अनुबंध करके उनकी जमीन को अपनी बताकर बेचते हैं। खोराबार से लेकर देवरिया रोड, मेडिकल कॉलेज रोड, पिपराइच रोड, वाराणसी और लखनऊ रोड पर इस तरह की तमाम अवैध कॉलोनियां बसाई जा रही है।

जिन क्षेत्रों में प्राधिकरण का सीमा विस्तार हुआ है, वहां नई महायोजना लागू होते ही प्लाटिंग करके जमीन बेचने से पहले उसका ले-आउट स्वीकृत कराना अनिवार्य हो जाएगा। यही नहीं, प्रोजेक्ट का रियल इस्टेट रेगुलेटरी एक्ट (रेरा) में पंजीकरण भी कराना अनिवार्य होगा। नई महायोजना-2031 में शहर की सीमा से सटे प्राधिकरण के क्षेत्र की ज्यादातर जमीन कृषि से आवासीय की जा रही है। कृषि की जमीन सस्ती होती है जबकि आवासीय महंगी। ऐसे किसानों ने भी अपनी जमीन का दाम बढ़ा दिया है। अभी ये जमीन कारोबारी सिर्फ सड़क और बिजली के पोल आदि की मामूली सुविधाएं विकसित कर प्लाटिंग करके बेच रहे थे, लेकिन अब ऐसा नहीं कर पाएंगे।
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किसानों को मिलेगी सही कीमत, प्लाट लेने वालों को सुविधाएं

नई महायोजना-2031 में जीडीए के दायरे वाले ज्यादातर क्षेत्र की कृषि की जमीन का भू-प्रयोग बदलकर आवासीय किया जा रहा है। आवासीय की कीमत अधिक होने की वजह से काश्तकारों को उनकी जमीन की अच्छी कीमत मिलेगी। वहीं, जीडीए द्वारा बढ़ाए गए दायरे को भी महायोजना-2031 में शामिल किए जाने के बाद कॉलोनी विकसित कर प्लॉट बेचने वालों को जीडीए से ले-आउट स्वीकृत कराना होगा। साथ ही रेरा में रजिस्ट्रेशन जरूरी हो जाएगा। इससे प्लाट लेने वालों को जरूरी सुविधाएं मिलेंगी। सड़क, नाली टूटने पर प्राधिकरण उसे दुरुस्त भी कराएगा।

जीडीए सचिव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि  प्राधिकरण के दायरे में जो नए गांव शामिल हुए हैं, वे भी नई महायोजना में शामिल किए जा रहे हैं। ऐसे में वहां सुनियोजित विकास हो इसलिए अवैध तरीके से कॉलोनी विकसित कर प्लॉट बेचने वालों को चिह्नित कर नोटिस दिया जा रहा है। अब तक 113 लोगों को नोटिस भेजा जा चुका है।

जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि अब कोई बिचौलिया काश्तकारों से कम दाम पर जमीन का सौदा कर ज्यादा मुनाफा नहीं कमा सकेगा। जीडीए ने जिस क्षेत्र में भी सीमा विस्तार किया है, उसे नई महायोजना में शामिल किया जा रहा है। ऐसे में अवैध तरीके से कॉलोनी बसाने वालों को नोटिस दिया गया है। साथ ही काम भी रुकवा दिया गया है। किसी ने भी नोटिस की अनदेखी कर निर्माण कराया तो कार्रवाई की जाएगी। अब सीमा विस्तार वाले इलाकों में भी कॉलोनी विकसित करने के लिए जीडीए से ले-आउट स्वीकृत कराना होगा। साथ ही रेरा में पंजीकरण भी जरूरी है। इससे किसानों को जमीन का सही दाम मिलेगा। अवैध कॉलोनी बसने से रोका जा सकेगा। लोगों को सुविधाएं ज्यादा मिलेंगी।



 
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