सत्यम हॉस्पिटल में तीन जनवरी को जैनपुर टोला काजीपुर निवासी रामवदन की गर्भवती पत्नी सोनवत की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मामले में पुलिस रामवदन की तहरीर पर रंजीत निषाद के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया था। मामले में रंजीत निषाद को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
सत्यम हॉस्पिटल के लेटर पैड पर लिखे डॉक्टरों की डिग्री पर सवाल
गुलरिहा क्षेत्र के भटहट स्थित सत्यम हॉस्पिटल के पैड पर जिन नौ डॉक्टरों के नाम लिखे हैं, उनकी डिग्री सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि नौ में से पांच डॉक्टरों की डिग्री संदिग्ध है। इसी आधार पर पुलिस के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी इन डॉक्टरों की डिग्री की जांच शुरू कर दी है।
सभी डॉक्टरों से उनकी डिग्री मांगी गई है, जिससे की वह एनएमसी (नेशनल मेडिकल काउंसिल) को पत्र भेजकर डिग्री की जांच करा सके। यही वजह है कि पुलिस ने इन नौ डॉक्टरों को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन एक्ट के तहत नोटिस भेजकर डिग्री के साथ जांच के लिए बुलाया है।
हॉस्पिटल के लेटर पैड पर डॉ. बृजेश शुक्ला, डॉ. रेनू मिश्रा, डॉ. निर्भय सिंह, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. डीके तिवारी, डॉ. विनोद शर्मा, डॉ. कमलेश यादव, डॉ. शबनम बानो एवं डॉ. पीके बक्शी के नाम शामिल हैं। इन डॉक्टरों को गर्भवती महिला की मौत के मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन एक्ट के तहत नोटिस भेजकर अपनी डिग्री के साथ उपस्थित होने को कहा गया है।
शुरुआती जांच में जो जानकारी मिली है कि पांच के पास डॉक्टरी की कोई डिग्री नहीं है। संचालक सुभाष और उसका बेटा रंजीत निषाद अपने जानने वालों के नाम के आगे डॉक्टर लिखकर पैड पर लिखवा दिया था। इनमें कुछ डॉक्टर ऐसे हैं, जो ऑनकॉल बुलाने पर हॉस्पिटल में इलाज के लिए जाते थे। ये सर्जरी सबसे अधिक करते थे। सामान्य सर्जरी के नाम पर कम से कम 30 से 35 हजार रुपये मरीजों से वसूलते थे।
एसीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सभी डॉक्टरों की डिग्री की जांच की जाएगी। डिग्री मिलने के बाद उसे एनएमसी जांच के लिए भेजा जाएगा, जिससे यह पता चल सके कि वह वह प्रैक्टिस करने योग्य थे या नहीं। क्योंकि, बिना एनएमसी की परीक्षा पास किए कोई भी डॉक्टर प्रैक्टिस नहीं कर सकता है।
रंजीत निषाद बड़े डॉक्टर के नाम पर मरीजों का जबरदस्त शोषण करता था। हॉस्पिटल से बीआरडी की दूरी ज्यादा न होने की वजह से वह मरीजों से कहता था कि वह मेडिकल कॉलेज से बड़े डॉक्टर को बुलाकर सर्जरी कराएगा। इसके एवज में मोटी रकम वसूलता था। वह मरीजों को यह भी बताता था कि अस्पताल बीआरडी से पढ़े डॉक्टर ही चलाते हैं। उनके नाम पर ही अस्पताल का पंजीकरण है।
मरीजों की मरहम पट्टी करते-करते खुद बन गया डॉक्टर
रंजीत निषाद शुरुआती दौर में पहले बिना रजिस्ट्रेशन के हॉस्पिटल चलाता था। दो बार हॉस्पिटल सील होने के बाद उसने अपने पिता सुभाष निषाद के साथ सत्यम हॉस्पिटल के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया। इसके बाद वह हॉस्पिटल में जुट गया। पहले वह मरीजों की मरहम पट्टी करता था। इसके बाद धीरे-धीरे ऑपरेशन थियेटर में डॉक्टरों के साथ रहने लगा। इस दौरान वह छोटी-छोटी सर्जरी भी करने लगा। इसके बाद से उस इलाके के लोग उसे डॉक्टर समझने लगे। जबकि, उसकी पढ़ाई केवल 12वीं तक थी।