उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष केदार नाथ सिंह का लखनऊ के गोमती नगर स्थित आवास में 93 वर्ष की उम्र में बुधवार को निधन हो गया। लार के खेमादेई गांव निवासी केएन सिंह पंतचत्व में विलीन हो गए।
सरयू के तट पर स्थित खेमादेई गांव के स्व. नवाब सिंह के पुत्र केदारनाथ सिंह का जन्म 1 जुलाई सन 1929 में हुआ। वे शुरू से ही मेधावी थे और उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा गांव में ही हुई। मझौली राज के बलभद्र इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा में पूरे प्रदेश में पांचवां स्थान हासिल किया। इसके बाद वे उच्च अध्ययन के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और परा स्नातक दर्शन शास्त्र विषय में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
वे आईएएस की परीक्षा में रिटेन क्वालीफाई किए और पूरे देश में टॉप 10 में जगह बनाई। लेकिन ग्रामीण परिवेश से होने के कारण पर्सनालिटी डेवलपमेंट इत्यादि में इंटरव्यू से बाहर हो गए। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश पीसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। सफलतापूर्वक परीक्षा पास करते हुए बहराइच में ट्रेनिंग ली। पहली पोस्टिंग लैंसडाउन (वर्तमान में उत्तराखंड) में बतौर एसडीएम के रूप में हुई।
इसके बाद सहारनपुर, बहराइच, गाजियाबाद आदि जिलों के जिला अधिकारी के रूप में कार्य किया। इसके अलावा वे कमिश्नर एवं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद को भी सुशोभित किया। इनकी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का प्रभाव इतना अधिक था कि वे सुचेता कृपलानी, वीर बहादुर सिंह और कल्याण सिंह के अत्यंत प्रिय और नजदीकी व्यक्तियों में से एक थे।
सेवानिवृत्त के पश्चात 1996-97 में उनको भाजपा उम्मीदवार के रूप में घोषित किए किया गया लेकिन समता पार्टी से समझौता होने के बाद वे अपने आप को राजनीति से हमेशा के लिए दरकिनार कर लिया। इसके बाद वे अपना शेष समय गरीब बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के लिए समर्पित कर दिया।
लखनऊ में बख्शी का तालाब स्थित आपने एक सीबीएसई बोर्ड से संबंध विद्यालय विवेकानंद की स्थापना की। जिसमें बहुत ही कम शुल्क पर और कुछ निर्धन बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है।