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गोरखपुर: पूरे दिन छाया रहा धुंध, नहीं महसूस हुई सूरज की तपिश

Fri, 26 Nov 2021 09:07 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

शुक्रवार को गोरखपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स फिर से रेड जोन में पहुंच गया। शुक्रवार को गोरखपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 299 दर्ज किया गया। हवा की यह गुणवत्ता स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से काफी खराब मानी जाती है।
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गोरखपुर में धुंध। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर में शुक्रवार को मौसम का मिजाज बदला रहा। सुबह से आसमान में जो धुंध छाना शुरू हुआ, वह देर शाम तक बना रहा। पूरे दिन कभी कभी सूरज बादलों के ओट से बाहर आया, लेकिन सूरज की तपिश बिलकुल महसूस नहीं हुई। इसकी वजह से पूरे दिन सिहरन बनी रही। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जब तक बारिश नहीं हो जाती है तब तक मौसम का मिजाज कुछ हद तक ऐसा ही बना रहेगा।

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दरअसल शुक्रवार को ऊपरी और निचले वायुमंडल में हवा की रफ्तार करीब करीब थमी सी रही। सुबह के वक्त वातावरण में 98 से 100 प्रतिशत तक नमी रही। वहीं पूरे दिन 78 प्रतिशत से नमी कम ही नहीं हुआ। वहीं ऊपरी वायुंडल में तो करीब दो से तीन किलोमीटर तक धुंध छाई हुई है। इसकी वजह से सूरज भी चांद की तरह नजर आता रहा।
 
मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने कहा कि जब तक बारिश नहीं हो जाती है तब तक ऐसी स्थिति के बने रहने की संभावना है। फिलहाल कोई सिस्टम भी नहीं बन रहा हे। ऐसे में कुछ तक धुंध वाली ही स्थिति बनी रहेगी। वहीं अगर ऊपरी वायुमंडल में 12 से 14 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चलेगी तो इस स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है।

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धुंध

कुहासा अथवा धुंध भी एक प्रकार का कोहरा ही होता है बस दृश्यता का अंतर होता है। यदि दृश्यता की सीमा एक किलोमीटर या एक किलोमीटर से कम हो तो उसे कुहासा या धुंध कहते हैं। इसमें वातावरण में नमी न्यूनतम 75 प्रतिशत होती है। धुंध की स्थिति में सूर्य की किरणों का धरातल पर पहुंचना काफी मुश्किल हो जाता है।   

कोहरा
कोहरा प्राय: ठंडी आर्द्र हवा में बनता है और इसके अस्तित्व में आने की प्रक्रिया बादलों जैसी ही होती है। सर्दियों में जब वायुमंडल का तापमान गिर जाता है तब वायु जलवाष्प से संतृप्त हो जाती है। यह जलवाष्प वायुमंडल में उपस्थित धूल व धूएं के कणों पर संघनित हो जाती है। पृथ्वी तल के आसपास बनी पानी की छोटी छोटी बूंदों के कारण वायुमंडल धुंधला दिखाई देने लगता है। यह धुंधलापन ही धुंध कहलाता है। यदि धुंध अधिक गहरी हो जाए तो उसे कोहरा कहते हैं।  

स्मॉग  
कोहरे जब धुएं से मिल जाता है तो उसे स्मॉग कहते हैं। स्मॉग ज्यादातर औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में जल कणों का कार्बन कणों तथा अन्य सूक्ष्म कणों के मिश्रण से अधिक तीव्रता से बनता है और ज्यादा देर तक बना रहता है। इसमें विभिन्न रसायनों की वाष्प मिल जाने से इसकी प्रवृति अम्लीय भी हो जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक होता है।  

रेड जोन में पहुंचा गोरखपुर का प्रदूषणस्तर, 299 दर्ज
शुक्रवार को गोरखपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स फिर से रेड जोन में पहुंच गया। शुक्रवार को गोरखपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 299 दर्ज किया गया। हवा की यह गुणवत्ता स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से काफी खराब मानी जाती है। दरअसल वातावरण में नमी काफी ज्यादा रहने, ऊपरी और निचले वायुमंडल में हवा की रफ्तार बहुत कम रहने की वजह से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। जबकि पिछले दिनों हल्की बूंदाबांदी होने से एयर क्वालिटी इंडेक्स सुधर कर 122 तक पहुंच गया था। मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि जब तक बारिश नहीं होती है या फिर तेज हवाएं नहीं चलती हैं तब तक प्रदूषण की गुणवत्ता में सुधार की संभावना कम है।

 
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