उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में लक्ष्मीपुर क्षेत्र के जंगल में स्थित टेढ़ी गांव के 13 टोले की तीन हजार की आबादी के आवागमन का साधन लकड़ी का पुल बाढ़ के पानी में बह गया था। बाढ़ पीड़ितों की कोई नहीं सुना तो गुरुवार को स्वयं मलाव नदी पर लकड़ी का पुल बनाने लगे। कांधपुर, बेलौहा, ब्रह्मपुर के 13 टोले तक जाने आने का कोई सुगम मार्ग नहीं है। चारों तरफ से नदी और जंगल से घिरा हुआ है।
राजस्व ग्राम ब्रह्मपुर, कांधपुर एवं बेलौहा के ग्रामीण बेदप्रकाश, गोविंद, हरीनाथ चौधरी, राकेश, दुर्गेश, अमरजीत, सेतबान, अंगद चौहान, पप्पू, सुमेर सहानी, कमलेश सहानी, बिहारी, रामकयास, कमलेश, रमेश, धर्मेंद्र कुमार, हरी चौधरी, राम मिलन आदि ने बताया कि इस बार के बाढ़ में ज्यादा परेशानी हुई। आवागमन का एक मात्र सहारा लकड़ी का पुल बाढ़ में बह था। अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को कई बार अपनी समस्या से अवगत कराया गया लेकिन किसी ने नहीं सुनी तब सभी लोग मिल कर मलाव नदी पर लड़की का पुल पुन: बना शुरू किया।
इसे भी पढ़ें- एक था जगदीशपुर गांव, राप्ती ने मिटा दिया वजूद
ग्रामीणों का कहना है कि हर बार प्रत्याशी मलाव नदी पर पुल बनवाने का वादा कर चले वोट ले लेते हैं। फिर अगले चुनाव में ही आते हैं। गांव चारों तरफ से रोहिन, मलाव नदी व जंगल से घिरा हुआ है।
ग्राम पंचायत टेढ़ी की ग्रामप्रधान कुसमावती ने बताया कि भौगोलिक दृष्टि अति पिछड़ा गांव है। मलाव व रोहिन नदी के बीच बसे इस गांव में पुल की अति आवश्यक है। इस बाबत खण्ड विकास अधिकारी अनिल यादव ने बताया कि टेढ़ी गांव के लोगों की सबसे बड़ी समस्या संपर्क मार्ग व पुल की है। इनकी समस्या से शासन को अवगत कराया गया है।