कोरोना महामारी के बीच पहले गोरखपुर के जिला अस्पताल की ओपीडी बंद होने और अब डॉक्टरों की मनमानी के कारण जन औषधि केंद्रों की 10 लाख रुपये से ज्यादा कीमत की जेनेरिक दवाएं एक्सपायर (खराब) हो गईं। इन दवाओं को संचालक वापस नहीं कर सकते हैं। संचालकों का कहना है कि ज्यादातर डॉक्टर जेनेरिक दवाएं नहीं लिख रहे हैं। यही वजह है कि औषधि केंद्र की दवाएं बिक नहीं रहीं हैं। जबकि केंद्र और प्रदेश सरकार का जोर जेनेरिक दवाओं पर ज्यादा है।
जानकारी के मुताबिक, जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल सहित शहर में नौ स्थानों पर जन औषधि केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इन केंद्रों पर मिलने वाली दवाएं ब्रांडेड दवाओं से 50 से 90 फीसदी तक सस्ती होती हैं। सरकार का उद्देश्य था कि इन केंद्रों के माध्यम से लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध हो सकें। लेकिन सरकार की इस मंशा पर डॉक्टर पानी फेर रहे हैं। एक तरफ जेनेरिक दवाएं डॉक्टर लिख नहीं रहे हैं। दूसरी ओर कोरोना की वजह से औषधि केंद्रों की दवाएं बिकी नहीं रही हैं। नतीजा यह हुआ कि इन नौ केंद्रों की करीब 10 लाख से अधिक की दवाएं एक्सपायर हो गईं।
केवल पांच दवाओं की हो सकी आपूर्ति
औषधि केंद्र के लिए 1200 जेनेरिक दवाओं की सूची है, लेकिन केंद्रों पर अब तक केवल 500 दवाओं की आपूर्ति हो सकी है। इनमें बुखार, दर्द, शुगर, बीपी की दवाओं की मांग ज्यादा होने पर केवल 60 से 70 डब्बे ही भेजे जाते हैं।
ये दवाएं हुईं औषधि केंद्र से खत्म
जिला अस्पताल और महिला अस्पताल समेत अन्य जन औषधि केंद्रों पर पिछले एक माह से बीपी, शुगर, दर्द-बुखार, दाद-खाज-खुजली, कैल्शियम, मल्टी विटामिन, थायरायड, आयरन, कफ सिरप आदि दवाएं खत्म हैं। जबकि कई बार दवाओं का ऑर्डर किया जा चुका है।
ये दवाएं हुईं एक्सपायर
जिला अस्पताल में औषधि केंद्र चलाने वाले संचालक फार्मासिस्ट वसीउल्लाह खान ने बताया कि कोरोना महामारी शुरू होने से लेकर अब तक एंटीबायोटिक के टेबलेट व इंजेक्शन, बच्चों के सिरप, दर्द, बुखार, गैस, बीपी, शुगर, पेट दर्द, आई ड्रॉप, कोलेस्ट्राल व न्यूरो की दवाओं सहित 100 से अधिक दवाएं एक्सपायर हो चुकी हैं। ये दवाएं अब वापस नहीं हो सकती हैं। बताया कि अकेले उनके केंद्र पर ही साढ़े तीन लाख की दवाएं खराब हुईं हैं। जबकि महिला अस्पताल की बात करें तो 50 हजार, कूड़ाघाट में बड़ा सेंटर होने की वजह से चार लाख की दवाएं एक्सपायर हो चुकी हैं।
जिला अस्पताल एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे जेनेरिक दवाएं ही लिखें, जिससे मरीजों को सस्ती दर पर दवाएं मिलें। यदि डॉक्टर ऐसा नहीं कर रहे हैं तो शिकायत मिलने पर जांच करके कार्रवाई की जाएगी।