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Exclusive: तीन रुपये के स्टांप पर 'खेल', स्वतंत्रता सेनानी का पौत्र बन एक परिवार से पांच बने डॉक्टर

Sat, 01 Feb 2020 10:10 PM IST
विजय जैन संतोष सिंह/शुभम सिंह, गोरखपुर

सार

  • - शासन ने शुरू कराई जांच, तहसीलदार कैंपियरगंज ने तलब किए दस्तावेज
  • - जिस व्यक्ति का गोदनामा, उसके बेटों के साथ ही भाई ने भी आरक्षण का लाभ लिया
  • - आरोपों से घिरे लोगों की एडिशनल सीएमओ, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक के रूप में तैनाती
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खलीलाबाद संतकबीरनगर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यशोमित्र उर्फ वसुमित्र के नाम और उस पर मिलने वाले आरक्षण का लाभ लेकर जसवल बाजार गोरखपुर के एक ही परिवार के पांच सदस्यों ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर ली।
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अब एडिशनल सीएमओ और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक के रूप में तैनात हैं। एक सदस्य एम्स में जूनियर रेजिडेंट (जेआर)  है तो एक एमडी की तैयारी में लगा है। इन आरोपों की लिखित शिकायत मिलने पर शासन ने इसकी जांच शुरू करा दी है। प्रारंभिक जांच में तमाम गड़बड़ी सामने आई है।

जानकारी के मुताबिक जसवल बाजार के रमेश चंद्र के चार बेटों व उनके भाई की एमबीबीएस की पढ़ाई और उनकी सरकारी विभागों में तैनाती की जांच शुरू हो गई है। तहसीलदार कैंपियरगंज शशि भूषण पाठक पूरे मामले की जांच करके जल्द ही रिपोर्ट जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन को देंगे। जिलाधिकारी के स्तर से रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। आरोप है कि तीन रुपये के अपंजीकृत स्टांप पेपर पर गोदनामा बनवाकर पूरा खेल किया गया है।
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रमेश चंद्र पुत्र किशोरी लाल ने 2010 में जंगलकौड़िया विकास खंड के वार्ड नंबर 46 से क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और जीता था। इस चुनाव में जो नामांकन पत्र दाखिल किया था, उसमें पिता के नाम के कॉलम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यशोमित्र का नाम नहीं था। रमेश चंद्र के नाम से राशन की सरकारी दुकान भी है, जिसमें पिता का नाम किशोरी लाल है।

इसके बावजूद रमेश ने अपने बेटों पंकज जायसवाल, पवन जायसवाल, अमित जायसवाल और पुनीत जायसवाल को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यशोमित्र का पौत्र बनाकर एमबीबीएस में दाखिला कराया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के पाल्यों को एमबीबीएस के दाखिले में दो फीसदी कोटा मिलता है। इसकी शिकायत शासन को मिली तो जांच शुरू हो गई है।

जांच में सामने आया ये सच

जांच में सामने आया है कि रमेश चंद्र के बेटे डॉ. पंकज जायसवाल और डॉ. पवन जायसवाल ने एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है। डॉ. पंकज इस वक्त महराजगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परतावल तो डॉ. पवन जायसवाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घुघली में तैनात हैं।

इसी तरह डॉ. पुनीत ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और वह एम्स में जूनियर रेजिडेंट (जेआर) हैं। डॉ. अमित जायसवाल ने एसवीवीपी मेडिकल कॉलेज मेरठ से एमबीबीएस किया है। वह अब नई दिल्ली से एमडी की तैयारी में लगे हैं। इन सभी ने एमबीबीएस की पढ़ाई में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आरक्षित श्रेणी का लाभ लिया है।

इस सिलसिले में रमेश चंद्र, उनके पुत्र डॉ. पुनीत जायसवाल और डॉ. अमित जायसवाल से मोबाइल फोन पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। उन्हें इस संबंध में मैसेज भेजे गए हैं, जब भी उनका पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।

गोदनामा अपंजीकृत

आरोप है कि जसवल बाजार के रमेश चंद्र जायसवाल पुत्र किशोरीलाल ने एक नवंबर 1969 को अपंजीकृत गोदनामा बनवाया और दिखाया कि ग्राम नौसड़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यशोमित्र ने उन्हें गोद लिया। इस गोदनामा में कहा गया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के प्राकृतिक पुत्र नहीं हैं। तब रमेश की उम्र पांच वर्ष दर्शाई गई थी।

इसी बीच पता चला कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के दो बेटे सर्वजीत और अभयजीत के साथ एक बेटी भी है। गोदनामे के बाद भी रमेश चंद्र का निवास स्थान नहीं बदला। नियमानुसार, गोदनामे के बाद बच्चा पिता के साथ रहने लगता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रमेश अपने वास्तविक पिता किशोरी लाल जायसवाल के साथ ही रह रहे थे। रमेश की शादी हुई तो चार बेटे पैदा हुए।

सभी बेटों ने एमबीबीएस की तैयारी शुरू की और खुद को किशोरी लाल की जगह स्वतंत्रता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यशोमित्र का पौत्र बताया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को दाखिले में दो फीसदी का कोटा मिलता है।

इसके सहारे ही रमेश चन्द्र के बेटे डॉ. पंकज जायसवाल, डॉ. पवन जायसवाल, डॉ. पुनीत जायसवाल और डॉ. अमित जायसवाल ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर ली।  रमेश चंद्र के भाई सुनील जायसवाल भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यशोमित्र का पौत्र बनकर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने में सफल हो गए।
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शासन के आदेश पर शुरू हुई जांच

शासन के आदेश पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के कोटे से एमबीबीएस में दाखिला लेने और सरकारी नौकरी पाने की जांच की जा रही है। सभी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जल्द ही रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाएगी। तहसील, विकास खंड और ग्राम पंचायत से अलग-अलग दस्तावेज निकलवाए गए हैं।
शशिभूषण पाठक, तहसीलदार कैंपियरगंज

ग्राम प्रधान रंजिश के नाते शिकायत कर रहे हैं। कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया गया है। इस मामले की जांच पहले भी हो चुकी है। कहीं कुछ नहीं मिला था। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने पिता जी को एडाप्ट किया था। इसका गोदनामा भी है। गलत तरीके से एमबीबीएस में दाखिला नहीं लिया गया है।
डॉ. पंकज जायसवाल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परतावल महराजगंज

जो लोग इस मामले को उठा रहे हैं, उनका आपराधिक इतिहास है। पिछले 10 साल से शिकायत और जांच का सिलसिला चल रहा है। कहीं कुछ गड़बड़ी नहीं मिली है। सब कुछ दुरुस्त है। सिर्फ परेशान किया जा रहा है। यदि शिकायत का सिलसिला नहीं थमा तो मानहानि का मुकदमा किया जाएगा।
डॉ. पवन जायसवाल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घुघली महराजगंज
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