पूर्वोत्तर रेलवे के सिग्नल कारखाने में भी जल्द ही इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर बनने लगेंगे। रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) ने पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन को इसके निर्माण की अनुमति दे दी है। रेल प्रशासन ने अब तैयारी भी शुरू कर दी है।
रेलवे क्रॉसिंगों पर अब इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर लगाए जा रहे हैं। जिन क्रॉसिंग पर गाड़ियों की आवाजाही ज्यादा है, उन्हें चिह्नित किया जा रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर में सिग्नल का बड़ा कारखाना है, लेकिन अभी तक यहां इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर नहीं बनाया जाता था। दूसरे जोन के कारखानों पर रेल प्रशासन निर्भर था। अब कारखानों में संसाधनों के बढ़ाने के बाद टूल्स और जरूरी उपकरण को भी बनाने की तैयारी शुरू की गई है। इसी क्रम में इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर बनाने के लिए आरडीएसओ में आवेदन किया गया था। आरडीएसओ ने तैयारियों को परखने के बाद इसे मंजूरी दे दी है।
अलग वर्कशॉप बनेगा
सिग्नल कारखाना में इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर बनाने के लिए अलग से वर्कशॉप भी बनेगी। इस वर्कशॉप में तैयार इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर को मांग के अनुरूप दूसरे जोन में भी भेजा जाएगा।
ऐसे काम करता है इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर
इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर क्रॉसिंग के 180 मीटर पहले लगे सिग्नल से जुड़ा होता है। ट्रेन जब क्रॉसिंग के सिग्नल के पहले होती है तो कंट्रोल रूम की सूचना पर ऑपरेटर बटन दबाकर फाटक को गिरा देता है। फाटक गिरने के बाद ट्रेन को ऑटो ग्रीन सिग्नल मिल जाता है। इसी तरह ट्रेन के गुजरने पर सिग्नल मिलने पर ऑपरेटर फाटक को उठा देता है।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि व्यस्त क्रॉसिंगों पर इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर लगाने का कार्य किया जा रहा है, जिससे बैरियर को खोलने और बंद करने में कम समय लगता है। रोड यूजर्स को भी इससे सुविधा मिलेगी। गोरखपुर सिग्नल कारखाने में लिफ्टिंग बैरियर बनाने के लिए आधारभूत संरचना तैयार करने के लिए एक कार्य स्वीकृत है। यह कार्य प्रगति पर है। इस कार्य के पूर्ण होने पर पूर्वोत्तर रेलवे एवं अन्य रेलों की आवश्यकता पर यहां इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर बनाया जा सकेगा।