पांच दिवसीय दिवाली पर्व के तहत धनतेरस का पर्व दो नवंबर को मनाया जाएगा। वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार दो नवंबर को द्वादशी तिथि का मान सुबह आठ बजकर 35 मिनट तक, इसके बाद संपूर्ण दिन, रात्रि और अगले दिन सुबह सात बजकर 14 मिनट तक त्रयोदशी है। इस दिन वैधृति योग और धाता नामक महा औदायिक योग है। इस योग में खरीदारी करना शुभकारी रहेगा।
पंडित शरद चंद्र मिश्र बताते हैं कि धनतेरस के दिन से ही पांच दिनों के दीप पर्व की शुरुआत होती है। धनतेरस पर्व कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है। इसे मुख्य रूप से दो रूपों में मनाया जाता है। पहला धन्वंतरि जयंती और दूसरा धनतेरस। इस दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन आयुर्वेद जगत में धन्वंतरि जयंती उत्सव के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन धन के स्वामी कुबेर की भी पूजा की जाती है। इस दिन धातु के बने बर्तनों को खरीदना समृद्धि का सूचक माना जाता है।
धनतेरस के दिन क्या करें
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन बताते हैं कि धनतेरस के दिन सायंकाल यम के निमित्त दीपदान किया जाता है। ऐसा करने से घर में अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। धनतेरस के दिन घर की साफ-सफाई कर आंगन आदि को धोकर रंगोलियां बनाई जाती हैं। मान्यता है कि रंगोलियों से घर में सुख-समृद्धि आती है और घर से नकारात्मक ऊर्जा का निष्कासन होता है। धनतेरस को उधार देना निषिद्ध है।
धनतेरस पर खरीदारी मुहूर्त
- सुबह 10:35 से 12:00 बजे तक लाभ बेला
- दोपहर 12:01 से 01:26 तक अमृत बेला
- शाम 05:32 से 07:46 तक प्रदोष काल
- रात्रि 9:30 से 12:00 निशीथ काल