उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) का गठन होगा। राज्य स्तरीय बैंक अकाउंट पीएमयू ही संचालित करेगा। पीएमयू की ओर से योजना का वेब पोर्टल व मोबाइल एप तैयार होगा। इसी पोर्टल के माध्यम से दानकर्ता व सरकार की अनुदान राशि बैंक खाते में जमा कराई जाएगी। ग्राम पंचायत, विकासखंड व मुख्य विकास अधिकारी के लिए लॉग इन आइडी व पासवर्ड तैयार किया जाएगा।
दान मिलने के 30 दिन में योजना को मिलेगी प्रशासनिक मंजूरी
योजना के तहत दानकर्ता द्वारा उत्तर प्रदेश मातृभूमि सोसाइटी के बैंक खाते में धनराशि दान करने के 30 दिन के भीतर प्रशासनिक अनुमति प्रदान करनी होगी। मुख्य विकास अधिकारी अपनी प्रशासनिक स्वीकृति के साथ डीएम को उस कार्य की प्रगति से अवगत कराएंगे। दानदाताओं से संपर्क व समस्या निवारण के लिए कॉल सेंटर बनेगा। काल सेंटर के मैन पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि का इंतजाम सोसाइटी करेगी। निर्माण कार्य सरकारी व निजी कंपनी भी करा सकती हैं।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने कहा कि योजना के तहत विकास का सारा श्रेय दानदेता को मिलेगा। शिलापट दानदाता का ही लगेगा। इसके लिए योजना की कुल धनराशि का 60 फीसदी उन्हें देना होगा। शेष 40 फीसदी सरकार अनुदान के रूप में देगी। दरअसल काफी संख्या में लोग अपनी ग्राम पंचायतों से निकल दूसरे राज्यों एवं देशों में बस गए हैं। ये लोग आर्थिक रूप से समर्थ हैं और अब भी अपने गांव के विकास के लिए कुछ करने का भाव रखते हैं। उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना का व्यवस्थित प्लेटफार्म उन्हें विकल्प उपलब्ध कराएगा। इच्छुक लोग मुझसे, बीडीओ या एडीओ से संपर्क कर सकते हैं।