देर से पहुंची फ्लाइट, परेशान रहे लोग
डिप्टी सीएम को दोपहर 12 बजे ही एम्स पहुंचना था। इसके लिए सभी तैयारियां 11 बजे तक पूरी कर ली गईं। एम्स परिसर में रहने वाले डॉक्टर व अन्य कर्मचारी अपने मासूम बच्चों को पोलियोरोधी ड्राॅप पिलाने लेकर पहुंचे थे। लेकिन, डिप्टी सीएम की फ्लाइट ही लेट हो गई। बताया जा रहा था कि गोरखपुर एयरपोर्ट के पार्किंग एरिया में पहले से ही एक बड़ी सवारी जहाज खड़ी होने के चलते लखनऊ से आने वाली फ्लाइट विलंब से आई।
करीब डेढ़ घंटे के इंतजार के बाद पहुंचे डीएम सीएम बमुश्किल 10 मिनट में ही सारे कार्यक्रम निपटाकर भाजपा के किसी कार्यक्रम में शामिल होने चले गए। बता दें कि इससे पहले बीते अगस्त में भी डिप्टी सीएम एम्स में एक स्वास्थ्य कार्यक्रम में तीन घंटे की देरी से पहुंचे थे।
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दवा लेने आई बुजुर्ग देवकी पांडेय से पूछा हाल
बच्चों को ड्रॉप पिलाकर लौट रहे डिप्टी सीएम ने भीड़ में खड़ी 65 वर्षीया देवकी देवी को देखा तो हाथ जोड़कर रुक गए। कुशल क्षेम पूछने के बाद यहां आने का कारण पूछा तो महिला ने बताया कि वह बिहार प्रांत के सिवान जिले के मैरवा की रहने वाली हैं और यहां बेटी के पास आई हैं। कान में कुछ दिक्कत थी तो एम्स आ गई। यहां आने पर पता लगा कि आज छुट्टी है, लेकिन एक डॉक्टर साहब ने पर्चे पर दवाई लिख दी है। अब दवा लेने जा रही हैं।
संक्रामक वायरल रोग है पोलियो
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ नंदलाल कुशवाहा ने बताया कि पोलियो एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है जो पांच साल से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करता है। यह मल, मौखिक मार्ग, दूषित पानी, आहार आदि के माध्यम से आंत में पनपता है और वहां से तंत्रिका तंत्र में पहुंच कर पक्षाघात उत्पन्न करता है।
पोलियो के प्रारंभिक लक्षणों में बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, गर्दन की अकड़न और अंगों में दर्द शामिल है। इसके कारण दिव्यांगता का खतरा रहता है। इसके कारण होने वाले पक्षाघात से पांच से दस फीसदी मामलों में मौत भी हो जाती है ।
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आज से 1494 टीमें घर-घर जाकर पिला रही दवा
गोरखपुर जिले पोलिया से प्रतिरक्षण के लिए चलने वाले अभियान के बारे में जानकारी देते हुए डिप्टी सीएम ने बताया कि सोमवार से 1494 टीम 15 दिसंबर तक घर-घर जाकर दवा पिलाएंगी। जो बच्चे छूट जाएंगे उन्हें 17 दिसंबर को बी टीम दवा पिलाएगी। इस बार 6.47 लाख बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य है। सीएमओ डॉ.आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि पोलियो से बचाव का ड्रॉप बच्चों को जन्म के समय भी पिलाया जाता है। इसके बाद छह, दस और चौदह सप्ताह पर बच्चों को यह ड्रॉप पिलायी जाती है। इसकी बूस्टर डोज 16 से 24 महीने की उम्र में दी जाती है।