शिकायतकर्ता युवती परिजनों के साथ रविवार को भी आईजी कार्यालय पहुंची। यहां उसने आईजी अनिल कुमार राय को घटना के संबंध में दस्तावेज दिए। आईजी ने पीड़िता से कई सवाल भी किए।
यह था मामला
आरोप के मुताबिक, लॉकडाउन के दौरान बिना मास्क लगाई एक लड़की को कोतवाली क्षेत्र की चौकी सोनूपार के इंचार्ज दीपक सिंह ने रोका और चालान न करने के एवज में उसका मोबाइल नंबर ले लिया। उसके बाद दरोगा युवती को अश्लील मैसेज भेजने लगा। विरोध करने में उसने फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। इसी बीच, युवती के गांव में चकरोड के लिए विवाद हो गया। इस मामले में ग्रामीणों ने दरोगा को बंधक बना लिया था। ग्रामीणों के साथ ही युवती के परिवार वालों पर भी मुकदमा दर्ज किया गया। युवती ने अश्लील मैसेज प्रकरण की जानकारी देते हुए दरोगा द्वारा फर्जी मुकदमे में फंसाने की शिकायत की। दरोगा दीपक सिंह पर अपने पद का दुरुपयोग करने की गूंज शासन तथा राज्य महिला आयोग तक पहुंची। उसके बाद प्रमुख सचिव गृह स्तर से एडीजी गोरखपुर जोन अखिल कुमार की अगुवाई में स्पेशल जांच टीम गठित कर दी गई। शनिवार को एडीजी खुद गांव पहुंचे थे। करीब सात घंटे तक टीम ने शिकायतकर्ता युवती के साथ उसके परिजनों और गांव के लोगों से पूछताछ कर बयान दर्ज किया। इसके कुछ देर बाद शासन स्तर से एसपी हेमराज मीणा को हटा दिया गया। एडीजी अखिल कुमार के निर्देश पर आरोपी दरोगा दीपक सिंह और कोतवाल रामपाल यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।