उन्होंने कहा कि इन्हें नाम मात्र की दवा दी गई है। जिला का पहला मरीज जिसे ठीक होने में समय लगा, उसे शुगर, किडनी और हार्ट की बीमारी थी। इसकी वजह से उसे थोड़ी दवाएं अलग दी गई है। वरना अन्य मरीजों को सामान्य दवाएं दी गई है, जो बेहद सस्ती हैं। एक-दो को थोड़ी संक्रमण की समस्या थी, तो एंटीबायोटिक दी गई हैं, जो पूरी तरह से कारगर रही है।
बीआरडी प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि अलाक्षणिक मरीजों को नाम मात्र की दवाएं दी गई है। इन मरीजों के खान-पान का असर ऐसा रहा है कि यह जल्दी ठीक हो गए हैं। यही वजह है कि केवल एक मरीज को अब तक ऑक्सीजन लगाना पड़ा है, जबकि 95 प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन की भी जरूरत नहीं पड़ी है।
लक्षण के आधार पर दी जा रही एंटीबाएटिक दवाएं
कोरोना मरीजों को लक्षण के आधार पर एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही है। कुछ मरीजों को एजीथ्रोमाइसिन दवा दी गई है, जिसकी कीमत 25 रुपये प्रति टैबलेट है। जबकि, कुछ को हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन दवा दी गई है। जिसकी कीमत छह से आठ रुपये के बीच है।