गोरखपुर में चकबंदी अधिकारी रुस्तमपुर ने आखिरकार गलती सुधारते हुए नूर मोहम्मद को मृत घोषित किए जाने वाले आदेश को निरस्त कर दिया है। इससे पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। अब राजस्व अभिलेखों में नूर मोहम्मद को जिंदा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सहजनवां तहसील के जैतपुर गौसपुर निवासी नूर मोहम्मद 30 वर्ष से रोजगार के सिलसिले में दिल्ली में रह रहे थे। वर्ष 2008 में गांव में चकबंदी हुई तो कुछ लोगों ने उनका फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र लगाकर चकबंदी कार्यालय में दर्ज करवा दिया। चकबंदी कार्यालय में दर्ज दस्तावेज के आधार पर इन लोगों ने नूर मोहम्मद की पैतृक जमीन और आवास हड़प लिया है। हाल ही में दिल्ली से लौटे नूर मोहम्मद को पता चला कि उन्हें मृत दर्शा कर कुछ लोगों ने जमीन हड़प ली। तब से वह जिले के आला अधिकारियों से लगायत राजस्व और चकबंदी विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
शुक्रवार को चकबंदी अधिकारी रुस्तमपुर ने नूर मोहम्मद की मृत्यु से संबंधित पूर्व में जारी आदेश निरस्त कर दिए। उन्होंने वर्ष 2008 में जारी आदेश को निरस्त कर अग्रिम कार्रवाई के लिए चकबंदी सीओ गोपलापुर कार्यालय भेजा है। अब अगली सुनवाई वहीं पर होगी।
चकबंदी न्यायालय रुस्तमपुर जगलाल पटेल ने बताया कि नूर मोहम्मद को मृत दर्शाने वाले पूर्व के आदेश को निरस्त कर दिया गया है। अब इस मामले की अग्रिम सुनवाई चकबंदी सीओ गोपलापुर के यहां होगी।