इसकी वजह से बच्चों को खड़े होने और बोलने में परेशानी होनी लगती है। उसके सोचने और समझने की शक्ति भी धीरे-धीरे कम होती जाती है। खाने के दौरान उसके मुंह से सामान्य की तुलना में ज्यादा लार निकलने लगते हैं।
बताया कि यह बीमारी मां के गर्भ से हो जाती है। लेकिन इंसेफेलाइटिस मरीजों में भी सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण मिल जाते हैं। ऐसे लोगों को सलाह दी जा रही है कि जन्म के बाद बच्चों को लगने वाले टीके जरूर लगवाएं। इसमें इंसेफेलाइटिस का टीका सबसे महत्वपूर्ण है।
सेरेब्रल पाल्सी की जांच लक्षणों के आधार पर की जाती है। इसके लिए सीटी स्कैन, एमआरआई, ईईजी (एलेक्ट्रासेफ्लोग्राम), फंडोस्कोपी की जांच की जाती है। इसमें स्पीच थेरेपी से लेकर फिजिकल थेरेपी और ऑक्युपेशनल थेरेपी शामिल हैं।