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यूपी: इंसेफेलाइटिस के साथ बच्चों को सेरेब्रल पाल्सी का भी दर्द, बीमारी से सुनने व खड़े होने में आ रही परेशानी

Tue, 19 Oct 2021 03:27 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

 बाल रोग विशेषज्ञ डॉ भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि सेरेब्रल पाल्सी मस्तिष्क और दिमाग की बीमारी है। इस तरह के केस बीआरडी में हर सप्ताह तीन से चार आ रहे हैं। इससे पीड़ित होने पर बच्चों के शरीर के कई अंगों की मांसपेशियां ठीक से काम नहीं करती है।
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इंसेफेलाइटिस। (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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इंसेफेलाइटिस के साथ पूर्वांचल में बच्चों को सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। इस बीमारी की वजह से बच्चों को सुनने से लेकर देखने, खड़े होने और सीखने तक में कठिनाई होती है। बच्चे के मस्तिष्क विकास में बाधा आती है। इंसेफेलाइटिस के मामलों में भी सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण मिलते-जुलते हैं।

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इस तरह के मामले रोज आ रहे हैं। यही वजह है डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि अगर बच्चों में सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण हैं तो तत्काल जांच कराएं। वरना जिंदगी भर बच्चा न सुन सकेगा न ही उसके मस्तिष्क का विकास हो पाएगा।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि सेरेब्रल पाल्सी मस्तिष्क और दिमाग की बीमारी है। इस तरह के केस बीआरडी में हर सप्ताह तीन से चार आ रहे हैं। इससे पीड़ित होने पर बच्चों के शरीर के कई अंगों की मांसपेशियां ठीक से काम नहीं करती है।

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यह जांच बेहद जरूरी

इसकी वजह से बच्चों को खड़े होने और बोलने में परेशानी होनी लगती है। उसके सोचने और समझने की शक्ति भी धीरे-धीरे कम होती जाती है। खाने के दौरान उसके मुंह से सामान्य  की तुलना में ज्यादा लार निकलने लगते हैं।

बताया कि यह बीमारी मां के गर्भ से हो जाती है। लेकिन इंसेफेलाइटिस मरीजों में भी सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण मिल जाते हैं। ऐसे लोगों को सलाह दी जा रही है कि जन्म के बाद बच्चों को लगने वाले टीके जरूर लगवाएं। इसमें इंसेफेलाइटिस का टीका सबसे महत्वपूर्ण है।

सेरेब्रल पाल्सी की जांच लक्षणों के आधार पर की जाती है। इसके लिए सीटी स्कैन, एमआरआई, ईईजी (एलेक्ट्रासेफ्लोग्राम), फंडोस्कोपी की जांच की जाती है। इसमें स्पीच थेरेपी से लेकर फिजिकल थेरेपी और ऑक्युपेशनल थेरेपी शामिल हैं।
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