राप्ती नदी के राजघाट पर बने गुरु गोरखनाथ घाट और श्रीराम घाट के अलावा आसपास छठ पूजा की वेदी बनती है। स्थानीय लोगों के अलावा यहां पर दूरदराज के श्रद्धालु भी छठ पूजा के लिए पहुंचते हैं। दशहरा में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन होने के बाद से कुछ लोगों ने छठ पूजा के लिए स्थानों पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया है। जगह-जगह इसके निशान नजर आने लगे हैं।
26 अक्तूबर को श्रीरामघाट की ओर एक व्यक्ति ने जगह कब्जा करने के लिए कृत्रिम फूलों की झालर लगाई थी। बुधवार को इसकी संख्या बढ़ी हुई नजर आई। करीब 30 स्थानों पर घेरेबंदी कर दी गई है। बुधवार की दोपहर 2.10 बजे गुरु गोरखनाथ घाट की सीढ़ियों पर जमी मिट्टी की सफाई के लिए दो ट्रैक्टर चलते मिली। चालक मिट्टी को उठाकर खेतों में ले जाकर डालते नजर आए। सीढ़ियों के आसपास नदी के किनारे वेदी बनाने के लिए जमीनों पर निशान बने दिखे। करीब दो सौ मीटर की दूरी तक ये निशान लगा दिए गए हैं।
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छठ पूजा की तैयारी में हो रही राजघाट की सफाई।
- फोटो : अमर उजाला।
श्रीरामघाट पर भी कब्जा किया गया है। श्रीरामघाट की तरफ पुल की दूसरी ओर जहां पर प्रतिमा विसर्जन बनाने के लिए पोखरे बने हैं, वहां पर जमीन पर मोबाइल नंबर लिखा मिला। उस नंबर पर जब बात की गई तो काॅल रिसीव करने वाले ने बताया कि लोग डंडा उखाड़ देते हैं। इसलिए मोबाइल नंबर लिख दिए हैं। पूछा गया कि कितने खर्च पर वेदी मिल जाएगी? उधर से बताया गया कि दिवाली के बाद मिलिएगा। कुछ इंतजाम करा देंगे। कुछ लोग दो-तीन सौ रुपये लेकर वेदी के लिए जगह उपलब्ध करा देंगे।
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राजघाट पुल के दोनों तरफ करीब आधा किमी तक छठ पूजा होती है। जिस तरफ घाट बने हुए हैं, उसके पास ही लाशें जलाईं जाती हैं। यहां पर भी पर कब्जा कर लिया गया है। इसके लिए जो घेरा बनाया गया है, उसमें लाशों के जलाने के बाद बची हुई लकड़ियां नजर आ रही हैं। इस दौरान पुल के नीचे कुछ लोग ताश खेलते हुए मिले।
उन्होंने बताया कि सारा स्थान पहले से बुक हो जाता है। साफ-सफाई के बाद कुछ पता नहीं चलता है। अभी तक तो कम कब्जा हुआ है। एक हफ्ते बाद आइएगा तो जगह नहीं मिलेगी।