कार्यक्रम में संबोधित करते जनरल रावत।
- फोटो : अमर उजाला।
चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने कहा कि पिछले कई सौ सालों से हमारे देश पर विदेशियों का कब्जा रहा है। जिसके कारण हमारी असली संस्कृति में बदलाव आया है। अब समय आ गया है कि हम अपनी पहचान को दोबारा लौटाएं। अपनी संस्कृति पर जोर दें। इसके लिए विद्यार्थियों को तैयार रहना होगा। संस्कृति से जुड़कर देश का प्राचीन गौरव वापस ला सकते हैं।
सीडीएस शुक्रवार को एमपी इंटर कॉलेज परिसर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। विद्यार्थियों को सफलता मंत्र समझाते हुए कहा कि अगर तारों तक पहुंचने की कोशिश करेंगे तभी चांद तक पहुंचना संभव हो सकेगा। सूरज की तरह चमकना है तो उसकी तरह जलना होगा। मेहनत के बाद जो सफलता मिलेगी, उसका स्वाद बिल्कुल अलग होगा।
विद्यार्थियों पर देश पर की उन्नति निर्भर
कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थी।
- फोटो : अमर उजाला।
जनरल रावत ने स्वामी विवेकानंद के उस कथन की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर आप रोज की दिनचर्या में मुश्किल हालात का सामना नहीं कर रहे तो निश्चित रूप से गलत रास्ते पर जा रहे। क्योंकि सही रास्ते पर चलने के दौरान हर हाल में मुश्किलें आएंगी। इन मुश्किलों और असफलता से हताश या निराश होने की नहीं बल्कि खुद तराशने और सही रास्ता तलाशने की जरूरत है। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की प्रशंसा की। कहा, जानकर अच्छा लगा कि परिषद की संस्थाओं में विद्यार्थी संस्कृत आधारित शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
जनरल रावत ने विद्यार्थियों को देश के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए कहा कि देश किस तरह उन्नति करेगा, यह विद्यार्थियों की उन्नति पर निर्भर है। सही और गलत की पहचान करना सीखें और सोच का हमेशा ऊंचा रखे। ऊंची सोच से ही हमारा देश ऊंचाइयों पर जाएगा। इसके लिए उन्होंने टीम भावना पर बल दिया। उन्होंने ’मैं’ के प्रभाव से बाहर निकलकर ’हम’ के भाव को अपनाने की सलाह भी दी। कहा कि अगर टीम बनाकर सकारात्मक सोच के साथ काम किया जाए तो सफलता मिलनी तय है।
जनरल ने सुनाई प्रेरणादायी कविता
कार्यक्रम में संबोधित करते जनरल रावत।
- फोटो : अमर उजाला।
जनरल ने विद्यार्थियों को अपने गुण-अवगुण पहचानने और अवगुणों को दरकिनार कर गुणों को साथ लेकर चलने की सीख भी दी। जनरल रावत ने बच्चों को एक प्रेरणादायी कविता भी सुनाई।
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो तुम
कहां खामियां रह गईं, इस पर विचार करो तुम
लगन के साथ आगे बढ़े चलो तुम
हर नई शिखर पर परचम लहराए चलो तुम