इस रिपोर्ट के आधार पर ही अपर आयुक्त प्रशासन को तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। कमिश्नर की जांच रिपोर्ट 8 अगस्त 2019 को प्रमुख सचिव नगर विकास को भी भेजी गई।
अब अलग-अलग मामलों की जांच जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन ने उप जिलाधिकारी बांसगांव पंकज दीक्षित से कराई तो घोटाला खुलकर सामने आ गया। इसी आधार पर ही वर्तमान अधिशासी अधिकारी ने बांसगांव नगर पंचायत के अध्यक्ष वेद प्रकाश शाही उर्फ पप्पू, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी व उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड मुरादाबाद के तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक के खिलाफ बांसगांव थाने में गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा कराया है। इस संबंध में आरोपित बांसगांव नगर पंचायत अध्यक्ष से उनका पक्ष जानने के प्रयास किए गए, मगर बात नहीं हो सकी। जब भी उनका पक्ष प्राप्त होगा, प्रकाशित किया जाएगा।
22 जुलाई 2019 के शासनादेश के मुताबिक 20 हजार रुपये तक का काम बिना कोटेशन कराया जा सकता है। यदि 20 हजार से एक भी रुपये का ज्यादा काम है तो कोटेशन अनिवार्य रूप से लेना होगा। यह व्यवस्था एक लाख रुपये तक के काम पर लागू रहती है। इससे ज्यादा की धनराशि पर काम करने का टेंडर निकाला जाता है। 10 लाख से अधिक का काम होता है तो ई-टेंडर कराना पड़ता है, लेकिन बांसगांव नगर पंचायत में ऐसा नहीं हुआ। 1.30 करोड़ 18 हजार 450 रुपये की खरीदारी कर ली गई, लेकिन ई-टेंडर नहीं कराए गए।
बांसगांव इंस्पेक्टर सीपी जैसल ने कहा कि मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है। मामला पुराना है। तमाम लोगों से पूछताछ की जाएगी। इसकी विवेचना अंबरीश बहादुर राजभर कर रहे हैं। जल्द ही आरोपितों से पूछताछ करके आगे की कार्रवाई की जाएगी।