दिवाली और छठ पर पटाखा फोड़ने में लापरवाही का असर अब दिख रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में एक सप्ताह के अंदर 16 बच्चे इलाज के लिए पहुंचे हैं। इनमें पटाखा से झुलसे तीन गंभीर बच्चों की आंखों का ऑपरेशन कर उनकी आंख और जान बचाई है। पटाखे की वजह से इनकी आंखें काफी चोटिल हो गईं थीं।
एक बच्चे का ऑपरेशन बृहस्पतिवार को किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक उसकी आंख में पांच मिलीमीटर का पत्थर का टुकड़ा पलक भेदते हुए पुतली में घुस गया था। दो अन्य बच्चों की आंख की पुतलियां भी झुलस गईं थीं। इनकी आंखें तो बच गई हैं लेकिन रोशनी लौटेगी या नहीं। इस पर अभी कुछ कह पाना मुश्किल है। फिलहाल डॉक्टर पट्टी खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक गगहा के अनमोल (12) को लेकर परिजन बुधवार को मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। परिजनों के मुताबिक छठ घाट पर पटाखे फोड़े जा रहे थे। इसी बीच एक पत्थर अनमोल की आंख में धंस गया और खून बहने लगा। जांच के बाद ऑपरेशन का फैसला लिया गया।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि पत्थर का टुकड़ा बड़ा था, जो आंख में घुस गया था। इस तरह का मामला पहली बार आया था। दो घंटे तक ऑपरेशन चला। टीम में डॉ. राजश्री पांडेय व डॉ. अंजार अहमद शामिल थे। बताया कि पट्टी खुलने के बाद पता चलेगा कि रोशनी लौटी या नहीं, लौटी तो कितने फीसदी।
इसके अलावा पिपराइच के 10 वर्षीय आदित्य व खोराबार के छह वर्षीय साहिल की आंखों की पुतलियां भी पटाखों से झुलस गईं थीं। उनका भी ऑपरेशन किया गया है। इनकी आंखों की रोशनी अगर आएगी भी तो काफी कम रहेगी। इसके लिए इलाज लंबा करना पड़ेगा। भविष्य में इन्हें मोतियाबिंद की भी दिक्कत हो सकती है। ऐसा होने पर ऑपरेशन करना पड़ेगा। लेकिन उनकी आंख व जान बचा ली गई है। साथ ही परिजनों को सलाह दी गई है कि समय-समयप पर इनकी जांच कराते रहें।