इसी तरह पूरा परिवार परेशान रहता था। उसके पिता व बड़े भाई अब नहीं रहे, लेकिन श्रीप्रकाश शुक्ला के चलते उनकी मुश्किलें हमेशा बनी रही। पिता के पास ईंट भट्ठा था तो बड़े भाई ओम प्रकाश शुक्ला ठेकेदार थे, लेकिन श्रीप्रकाश के चलते पिता और भाई भी अंडरग्राउंड ही रहने लगे। ऐसे में सारा कारोबार चौपट हो गया।
श्रीप्रकाश के नहीं रहने के बाद भी पुलिस-प्रशासन ने बहुत परेशान किया। यही नहीं, सामाजिक ताना भी हमेशा सुनने को मिलता था। यह सही है कि जब तक अपराधी जिंदा रहता है, लोग डर के चलते कुछ नहीं कहते हैं, लेकिन न रहने पर रिश्तेदार ही ढेर सारे ताने सुनाने लगते हैं।
दाउदपुर का मकान मिला कब्जे में
श्रीप्रकाश शुक्ला का आवास दाउदपुर में है। उसके आवास को प्रशासन ने जब्त कर लिया था और बाद में वहां पुलिस कमांडेंट का ऑफिस खोल दिया गया, जबकि उसके बड़े भाई आजाद चौक के पास किराए के मकान में रहने लगे। प्रेमचंद पार्क के पास उनकी एक जमीन थी। श्रीप्रकाश की मौत के कई साल बाद उन्होंने आवास बनवाया।