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Mafia Vinod Upadhyay: एक करोड़ में सौदा पटाया..खेल खुला तो माफिया को निपटाया

Tue, 09 Jan 2024 11:29 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

सूद के धंधे में माफिया विनोद उपाध्याय का सूदखोर से गहरा संबंध हो गया था। लंबे समय से विनोद उसके साथ काम करता था, इस वजह से उसे उस पर भरोसा भी था। अब इसी भरोसे की मदद से वह नेपाल गया और सूदखोर ने उसकी मदद भी खूब की। उसके बैंकाक तक जाने में फर्जी पासपोर्ट भी मुहैया कराया था।
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विनोद उपाध्याय के भाई के मकान पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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माफिया विनोद उपाध्याय ने मुठभेड़ से बचने के लिए पुलिस को पहले 55 लाख फिर एक करोड़ का ऑफर दिया था। कुछ अफसर इसे स्वीकार कर उसे कोर्ट में हाजिर करने की तैयारी में थे, तभी मामला लीक हो गया। मामला उच्च स्तर पर पहुंचा तो सख्त कार्रवाई का आदेश मिला। अपनी गर्दन फंसती देख अफसरों ने मुठभेड़ का प्लान तैयार किया और विनोद को झांसे में लेकर इसे अंजाम भी दे दिया।

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जानकारी के मुताबिक, लंबे समय बाद 24 मई 2023 को गुलरिहा थाने में माफिया विनोद उपाध्याय, उसके भाई संजय उपाध्याय, नौकर छोटू व दो अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया गया। पुलिस ने दाउदपुर निवासी कैंसर पीड़ित पूर्व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रवीण श्रीवास्तव की तहरीर पर सभी पर रंगदारी मांगने, तोड़फोड़ करने का केस दर्ज किया। प्रवीण ने बताया कि माफिया के घर के पास ही उसकी जमीन है, जिस पर निर्माण कार्य नहीं करा पा रहे हैं।

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यह वह समय था जब पुलिस अंडरग्राउंड क्राइम पर काम कर रही थी। इसके बाद ही छोटू को पुलिस ने जेल भेज दिया, लेकिन माफिया विनोद फरार हो गया। पुलिस ने विनोद, संजय पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। संजय कोर्ट में हाजिर हो जेल चला गया। विनोद फरार हो गया।

मुख्यमंत्री की निगरानी में माफिया के खिलाफ अभियान के चलते उस पर इनाम बढ़ते-बढ़ते एक लाख रुपये हो गया। तब छह महीने का समय गुजर चुका था और सभी बड़े माफिया जेल में थे, लेकिन विनोद पुलिस की आंखों की किरकिरी बना था।

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पुलिस ने घेराबंदी शुरू की तो माफिया बैंकाक भाग गया। फिर उसने नेपाल में शरण ली, पुलिस वहां तक गई तो उसे मुठभेड़ का डर सताने लगा था। इसी समय उसने गोरखपुर पुलिस से संपर्क करने की कोशिश की। बात नहीं बनी।

इसके बाद पुलिस ने उसके घर पर बुलडोजर चलाकर अपना रुख और साफ कर दिया। फिर उसने यूपी के एक बड़े अफसर से संपर्क साधा। परिवार के करीबी सूत्रों की मानें तो विनोद के करीबी और अफसर के बीच सेटिंग हुई, लेकिन मामला लीक हो गया। हालांकि उसकी मौत के बाद परिवार वाले खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। इस पूरे मामले में राजदार रहा नजदीकी तो छिपा फिर रहा है, लेकिन अफसर और विनोद के बीच का करार और फिर धोखा, चर्चा का विषय बना हुआ है।

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विनोद के साथी सूद के असल धंधेबाज की कुंडली तैयार कर रही पुलिस
विनोद को नेपाल में शरण देने वाले सूद के धंधेबाज व गोरखनाथ थाने के हिस्ट्रीशीटर की कुंडली पुलिस तैयार कर रही है। पुलिस माफिया के करीबियों के कारनामों पर नजर बनाए हुए है ताकि केस में उसके साथियों को सजा हो सके। उधर, पुलिस की गोपनीय जांच में कई अहम सुराग भी हाथ लगे हैं, जिसकी मदद से सूदखोर के कारनामे सामने आए हैं। हालांकि, इस पर अफसर अभी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

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सूद के धंधे में माफिया विनोद उपाध्याय का सूदखोर से गहरा संबंध हो गया था। लंबे समय से विनोद उसके साथ काम करता था, इस वजह से उसे उस पर भरोसा भी था। अब इसी भरोसे की मदद से वह नेपाल गया और सूदखोर ने उसकी मदद भी खूब की। उसके बैंकाक तक जाने में फर्जी पासपोर्ट भी मुहैया कराया था। लेकिन, अब जब विनोद की मौत हो चुकी है और उसके करीबियों पर पुलिस की नजर है तो सूदखोर गुर्गों को आगे कर दिया है। मगर, पुलिस पूरे प्रकरण की तह तक जांच शुरू कर दी है।
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