फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Don Shri prakash: भौकाल की चाहत ने श्रीप्रकाश को भी बनाया था माफिया, परिवार के लोग हो गए तबाह

Tue, 09 Jan 2024 12:07 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

श्रीप्रकाश शुक्ला का आवास दाउदपुर में है। उसके आवास को प्रशासन ने जब्त कर लिया था और बाद में वहां पुलिस कमांडेंट का ऑफिस खोल दिया गया, जबकि उसके बड़े भाई आजाद चौक के पास किराए के मकान में रहने लगे।
विज्ञापन
दाउदपुर स्थित डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला के भाई का घर। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अपराध की दुनिया में नाम-शोहरत कमाने और भौकाल की चाहत ने ही श्रीप्रकाश शुक्ला को कुख्यात बना दिया। पहलवानी में कॅरियर बनाने का सपना संजोए श्रीप्रकाश पहले स्कूल-मोहल्ले में गोल बनाकर मारपीट करने लगा। दाउदपुर में ठेकेदार राकेश तिवारी की हत्या के बाद वह पेशेवर हत्यारा बन गया। वह माफिया बन गया। कुख्यात हो गया, लेकिन परिवार के लोग तबाह होते गए।

विज्ञापन


मकान को प्रशासन ने सील कर दिया। पिता गांव तो भाई किराए के मकान में रहने लगे। श्रीप्रकाश की मौत के बाद भी परिवार के लोगों के माथे पर अपराधी के घर के होने का जो धब्बा लगा, वह लंबे समय तक धुल नहीं पाया। समाज के ताने से भी वे परेशान रहे।

मूलत: मामखोर, बड़हलंगज के रहने वाले रामसमुझ शुक्ला के चार पुत्र हैं। इसमें श्रीप्रकाश सबसे छोटा था। बचपन में वह मनबढ़ नहीं था। उसके सहपाठी रहे गांव के ही जिला पंचायत सदस्य मायाशंकर शुक्ल कहते हैं- हम लोगों ने साथ बचपन गुजारा है। साथ में ही पहलवानी भी की है। श्रीप्रकाश की संगत गलत लोगों से हो गई तो वह पहलवानी छोड़कर मारपीट में लग गया। इसके चलते गांव में अक्सर पुलिस आया करती थी और किसी ने किसी को साथ ले जाती थी।
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें: एक करोड़ में सौदा पटाया..खेल खुला तो माफिया को निपटाया

इसी तरह पूरा परिवार परेशान रहता था। उसके पिता व बड़े भाई अब नहीं रहे, लेकिन श्रीप्रकाश शुक्ला के चलते उनकी मुश्किलें हमेशा बनी रही। पिता के पास ईंट भट्ठा था तो बड़े भाई ओम प्रकाश शुक्ला ठेकेदार थे, लेकिन श्रीप्रकाश के चलते पिता और भाई भी अंडरग्राउंड ही रहने लगे। ऐसे में सारा कारोबार चौपट हो गया।

श्रीप्रकाश के नहीं रहने के बाद भी पुलिस-प्रशासन ने बहुत परेशान किया। यही नहीं, सामाजिक ताना भी हमेशा सुनने को मिलता था। यह सही है कि जब तक अपराधी जिंदा रहता है, लोग डर के चलते कुछ नहीं कहते हैं, लेकिन न रहने पर रिश्तेदार ही ढेर सारे ताने सुनाने लगते हैं।
 
विज्ञापन

दाउदपुर का मकान मिला कब्जे में
श्रीप्रकाश शुक्ला का आवास दाउदपुर में है। उसके आवास को प्रशासन ने जब्त कर लिया था और बाद में वहां पुलिस कमांडेंट का ऑफिस खोल दिया गया, जबकि उसके बड़े भाई आजाद चौक के पास किराए के मकान में रहने लगे। प्रेमचंद पार्क के पास उनकी एक जमीन थी। श्रीप्रकाश की मौत के कई साल बाद उन्होंने आवास बनवाया।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें