ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी को बटुक भैरव जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव ने भैरव के रूप में अवतार लिया था। यह भगवान शिव का क्रोधित, भयानक, विकराल और प्रचंड रूप हैं। बटुक भैरव की पूजा करने से शत्रुओं और विरोधियों का कोई भी षड्यंत्र सफल नहीं होता है।
ऐसे करें बटुक भैरव की पूजा
भैरव की पूजा में लाल कपड़ा धारण करने का विधान है। इनको चढ़ाए जाने वाले पुष्पों में कनेर और गुड़हल को प्राथमिकता देनी चाहिए। इनके नैवेद्य में खीर, आटा एवं मेवे से निर्मित पुए, गुड़ से बने पुए, गुड़ और घी से बनी लपसी, बेसन के लड्डू, अन्य तले हुए पदार्थ चढ़ाने चाहिए। बटुक भैरव की रात में पूजा करना अधिक लाभकारी है।