जांच के दौरान एटीएस के अलावा कैंट पुलिस ही मौजूद थी। इसके अलावा दुकान मालिक थे, सभी कर्मचारियों को एटीएस ने पूरे जांच के दौरान बाहर रखा। जांच पूरी होने के बाद ही किसी को अंदर जाने की अनुमति मिल सकी।
50 लाख रुपये की हुई थी बरामदगी
2018 में एटीएस की कार्रवाई के दौरान 50 लाख रुपये बरामद हुए थे। खबर तो यह भी है कि मोबाइल फोन कारोबारी भाइयों ने रुपये वापसी के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसके बाद एटीएस की जांच तेज हो गई है। हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं कर रहा है।
24 मार्च 2018 को हुई थी गिरफ्तारी
24 मार्च 2018 में छापेमारी करने के बाद एटीएस ने नसीम उनके भाई बाबी समेत सात लोगों के खिलाफ लखनऊ में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसकी विवेचना चल रही है। माना जा रहा है कि इसी की विवेचना करने को टीम गोरखपुर आई थी।
गिरफ्तार लोगों में संजय, नसीम और उमा को पाक हैंडलर बताया गया था। तब एटीएस ने बताया था कि ये लोग आतंकी संगठनों के खातों में रुपये भेजने का काम करते हैं।
इनकी हुई थी गिरफ्तारी
2018 में गोरखपुर के खोराबार इलाके के पांडेय टोला निवासी दयानंद यादव पुत्र सुदामा यादव, गोलघर, गांधी गली निवासी नसीम अहमद, उनके भाई अरशद नईम, कुशीनगर के पडरौना, नगर मस्जिद के सामने निवासी मुशर्रफ अंसारी उर्फ निखिल राय पुत्र युसूफ अंसारी, प्रतापगढ़ के रानीगंज के भगेसरा निवासी संजय सरोज पुत्र राम खेलावन, मध्यप्रदेश के रीवा बीड़ा, सेमरिया निवासी उमा प्रताप सिंह पुत्र शंकर सिंह, लखनऊ थाना पीजीआई के बरौली निवासी साहिल मसील पुत्र अमर सिंह, आजमगढ़, जियनपुर के तराव निवासी सुशील राय उर्फ अंकुर राय पुत्र प्रफुल्ल कुमार, प्रतापगढ़ के रानीगंज भगेसरा निवासी नीरज मिश्रा पुत्र राकेश मिश्रा और बिहार के गोपालगंज निवासी मुकेश प्रसाद पुत्र जलेश्वर प्रसाद को पकड़ा गया था।