अर्जुन अवार्डी डॉ. दलेल सिंह ने कहा, देश के विश्वविद्यालयों में खेल के आधारभूत संरचना को मजबूत करने की जरूरत है। खेल बजट बढ़ाने के साथ ही बेहतर कोच, स्पोर्ट्स हॉस्टल, फेलोशिप से विश्वविद्यालयों में खिलाड़ियों को निखारा जा सकता है। तभी ओलंपिक आदि खेलों में मिलने वालों पदकों में देश का प्रतिनिधित्व भी बढ़ सकेगा।
डॉ. सिंह रविवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय के क्रीड़ा परिषद की ओर से हो रहे कार्यक्रम में ऑनलाइन शरीक हुए। उन्होंने स्पॉट योर स्पोर्ट्स: लिसनिंग टू द लिविंग लीजेंड्स विषय पर विचार रखे। डॉ. दलेल कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, हरियाणा के शारीरिक शिक्षा के पूर्व निदेशक भी रह चुके हैं। कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालयों में पूर्ण विकसित खेल विभाग के साथ स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की संख्या बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा।
पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के शारीरिक शिक्षा के पूर्व निदेशक एवं टग ऑफ वॉर फेडरेशन ऑफ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. राज कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों में खेल के पूर्ण रूप से समर्पित विभाग का होना बहुत जरूरी है। तभी खेल की प्रतिभाओं को निखारा जा सकता है।
ओलंपिक में स्थान बनाने के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं देनी होंगी। साथ ही खिलाड़ियों और क्रीड़ा विभाग से जुड़े शिक्षकों को अकादमिक लाभ देना होगा। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा के उप निदेशक डॉ. आरएन सिंह ने कहा कि देश के शिक्षण संस्थाओं में खेल, संस्कृति विकसित किया जाना जरूरी है। इस दिशा में विश्वविद्यालयों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।
क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष प्रो. अजय शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत और विषय प्रवर्तन किया। कहा कोविड-19 के विपरीत समय में खिलाड़ियों को अपना मनोबल बनाए रखने की बेहद जरूरत है। संचालन डॉ. मनीष पांडेय एवं आभार ज्ञापन प्रो. शरद कुमार मिश्र ने किया। इस दौरान प्रो. सुधा यादव, प्रो. विजय चहल, प्रो. अनिल यादव, डॉ. राजवीर सिंह, डॉ. वंदना सिंह, डॉ. प्रतिमा जायसवाल, डॉ. हरीशचंद्र पांडेय, डॉ. अंबरीश श्रीवास्तव, डॉ. अंशु गुप्ता, डॉ. साजिद हुसैन, डॉ. अनुपमा कौशिक, डॉ. प्रीति गुप्ता, डॉ. मीतू सिंह, डॉ. आलोक सिंह, डॉ. हर्षदेव वर्मा, डॉ. जूली श्रीवास्तव सहित विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के खेल से जुड़े अनेक छात्र शामिल रहे।