धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष गीतांजलि मौर्य ने कहा कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में कहा था कि सरकार बनने के 120 दिन के अंदर सेवा शर्तों में सुधार किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मान जनक मानदेय दिया जाएगा। सरकार के साढ़े चार साल बीतने को हैं, पर सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया।
उन्होंने कहा कि करोना काल में जब लोग घरों से निकलने में डर रहे थे, तब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने लोगों के घरों तक जाकर कोविड मरीजों का हाल जाना। जब सरकार से सहयोग की अपेक्षा थी, तब उसने 62 की उम्र पूरी कर चुकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर बैठा दिया। न तो उन्हें पेंशन दी गई और न ही ग्रेच्युटी दी गई।
सरकार के इस वादा खिलाफी से प्रदेश की पौने चार लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानी तो आगामी विधानसभा चुनाव में कीमत चुकानी पड़ेगी।
ये हैं प्रमुख मांगें
- आंगनबाड़ी, मिनी आंगनबाड़ी व सहायिकाओं की सेवा नियमावली बनाई जाए।
- जब तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा नहीं, तब तक उनका मानदेय 18000 तथा सहायिका का 9000 किया जाए।
- 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को योग्यता के आधार पर मुख्य सेविका बनाया जाए।
- 62 साल की आयु पूरी कर चुकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बिना पेंशन ग्रेच्युटी के रिटायर कर दिया गया। अन्य राज्यों की भांति सुविधा दी जाए।
- मिनी आंगनबाड़ी को सामान्य आंगनबाड़ी के बराबर मानदेय दिया जाए।
- आंगनबाड़ी के रिक्त पदों पर सहायिकाओं की नियुक्ति की जाए।
- खाद्यान्न वितरण में आंगनबाड़ी को उलझाने की जगह बिहार राज्य की तरह कार्यकर्ता एवं मातृ शक्ति के खाते में पोषाहार की धनराशि भेजी जाए।