कुपोषण की समस्या ग्रामीण के साथ-साथ शहरी क्षेत्र में भी है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक पाली गांव में 89, हरैया में 47, नसरूद्दीन चक में 60, बेलवा रायपुर में 48, सराय गुलरिया में 58, मानीराम में 53, डोहरिया कला में 30, महराबारी में 32 और सरया तिवारी में 36 बच्चे कुपोषित श्रेणी में शामिल हैं। शहरी क्षेत्र के शाहपुर में 16, भैरोपुर में 36 और सेमरा नंबर एक में 38 बच्चे कुपोषित हैं।
215 गांवों में लगाए गए हैं अफसर
जिले के अति कुपोषित बच्चों को सुपोषित श्रेणी में लाने के लिए 215 गांवों में विशेष अभियान शुरू किया गया है। एक अक्तूबर से शुरू हुए अभियान के तहत 31 दिसंबर तक चिह्नित अति कुपोषित बच्चों को सुपोषित किया जाना है। इसके लिए 36 जिला स्तरीय अफसरों को दो-दो गांव आवंटित किए गए हैं। शेष 143 गांवों में ब्लॉक स्तरीय अफसरों को जिम्मेदारी दी गई है। इन अफसरों को संबंधित गांव में जाकर लोगों को कुपोषण के लक्षण व बचाव के उपाय बताते हुए इसके प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी मिली है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी हेमंत कुमार सिंह ने कहा कि कुपोषण मिटाने का अभियान सतत है। वर्ष 2014 में एक लाख से अधिक बच्चे कुपोषित थे, जो अब घटकर करीब 55 हजार रह गए हैं। कुपोषित श्रेणी के बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए जागरूकता जरूरी है। इसीलिए 36 जिला स्तरीय अफसरों के अलावा अन्य ब्लॉक स्तरीय अफसरों को भी जिम्मेदारी दी गई है। इन अफसरों की निगरानी में गांव में कुपोषण मिटाने के लिए चलने वाली योजनाओं का पूर्ण क्रियान्वयन कराना है। इसके अलावा ये अफसर व्यक्तिगत स्तर पर भी प्रयास करेंगे।