फुटकर व्यापारियों ने बताया कि नेताओं की सेटिंग काम नहीं आ पाई। यहां सिर्फ जरूरतमंदों को दुकानें दी गई थीं। कई बार बड़ी गाड़ियों से लोग दुकानों को लेकर पूछताछ करते थे। लेकिन अधिकारियों ने शीर्ष प्राथमिकता रेहड़ी वाले जरूरतमंदों को दिया। यही बात लोगों को शायद अखर गई होगी।
मुख्यमंत्री की अनुमति से ही बना था, अब हटने को चर्चा
नया सवेरा पर दुकानें मुख्यमंत्री की सहमति से बनाई गई थीं। लेकिन अचानक इसे हटाए जाने की बात होनी लगी। दरअसल, पहले इन वेंडर लोगों की दुकानें पार्क की तरफ की जानी थी। लेकिन वेंडर ने जाकर मुख्यमंत्री से फरियाद लगाई। उन्होंने सबकी सहूलियत देखते हुए उसी हिसाब से दुकानों का निर्माण करवाने का निर्देश दिया था। लेकिन अचानक दुकान हटाए जाने की चर्चा से अब ये लोग चिंतित हैं।
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दो महीने का किराया भी जमा कर चुके हैं
नौका विहार के पास दुकान लगाने वाले ब्रह्मदेव साहनी ने बताया कि सभी लोगों ने दो महीने का किराया भी जीडीए में जमा कर दिया है। एक महीना का चार हजार रुपया किराए के दर पर दो महीने का आठ हजार रुपए जमा किए जा चुके हैं। अब दुकान हटेंगी तो सबको बहुत परेशानी होगी।
दुकानें हटाए जाने को लेकर वेंडर से बात हुई है कि अगर दुकानें शिफ्ट की जाएं तो क्या पार्क के पास इन्हें निर्मित किया जा सकता है। हालांकि अभी कुछ तय नहीं हुआ है। विभाग के पास सीधे कोई निर्देश नहीं आया है। अधिकारियों के माध्यम से दुकानों को यहां से हटाए जाने की बात सामने आई है। वैसे भी ये दुकानें मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही बनीं थीं।
-उदय प्रताप सिंह, सचिव, जीडीए