निर्देशक राम गोपाल वर्मा अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। इन दिनों वह अपनी फिल्मों से ज्यादा विवादों के लिए अधिक जाने जाते हैं। इसे लेकर निर्देशक ने हाल ही में एक बातचीत में खुलकर बात की है। साथ ही बताया कि वह नैतिकता का सम्मान क्यों नहीं करते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूली शिक्षा के दौरान ही उनका विद्रोह शुरू हो गया था। निर्देशक ने रंगनायकम्मा द्वारा लिखित रामायण: द पॉइजनस ट्री का खुलासा किया, जिसने आलोचनात्मक सोच का द्वार खोल दिया।
राम गोपाल वर्मा ने रामायण: द पॉइजनस ट्री पर बात करते हुए कहा, 'मुझे लगता है एक तरह से किताब ने उस सोच को प्रेरित किया, क्योंकि रामायण जैसी पूजनीय चीज को उनके द्वारा मार्क्सवादी दृष्टिकोण से समझा जाना अविश्वसनीय था। इसलिए मैंने मार्क्सवाद का पहलू नहीं अपनाया, लेकिन तथ्य यह है कि आप चुनौती दे सकते हैं। ऐसा कुछ जिसके बारे में आप सोचते हैं कि उस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। चीजों को अंकित मूल्य पर न लेने के मामले में यह मेरा पहला प्रभाव था, जिस तरह से वे आपके माता-पिता या आपके शिक्षकों या किसी अन्य द्वारा आपको बताए गए थे।'
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राम गोपाल वर्मा ने आगे बताया कि इसके बाद उन्होंने और भी ऐसी दार्शनिक किताबें पढ़ीं, जिन्होंने उन्हें विद्रोही बना दिया। उन्होंने कहा, 'मैं एक विद्रोही की तरह रहता हूं। विद्रोही क्या है? विद्रोह कुछ और नहीं बल्कि जो स्वीकृत है उसके विरुद्ध जाना है, लेकिन मैं हमेशा एक ही बात का पालन करूंगा। मैं कानून का पालन करूंगा। मैं नैतिकता का पालन नहीं करता। मैं धर्म का पालन नहीं करता। क्योंकि कानून जरूरी है।'
निर्देशक ने आगे कहा, 'अगर आपको किसी शहर में रहना है तो उसके लिए आपको कुछ बातों का पालन करना जरूरी है। यह समाज से आपको मिलने वाले सभी लाभों के लिए भुगतान करने के लिए एक छोटी सी कीमत है। तो चार पहलुओं में, एकमात्र चीज जिसका मैं पालन करता हूं वह कानून है।'
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