-दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई
दिल में कुछ यूँ सँभालता हूँ ग़म
जैसे ज़ेवर सँभालता है कोई
आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
पेड़ पर पक गया है फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई
देर से गूँजते हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है कोई
-दर्द हल्का है साँस भारी है
जिए जाने की रस्म जारी है
आप के ब'अद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुजारी है
रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो
दिन की चादर अभी उतारी है
शाख पर कोई कहकहा तो खिले
कैसी चुप सी चमन पे तारी है
कल का हर वाकिआ तुम्हारा था
आज की दास्तां हमारी है
-ऐसा खामोश तो मंजर न फना का होता
मेरी तस्वीर भी गिरती तो छनाका होता
यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता
साँस मौसम की भी कुछ देर को चलने लगती
कोई झोंका तिरी पलकों की हवा का होता
काँच के पार तिरे हाथ नजर आते हैं
काश खुशबू की तरह रंग हिना का होता
क्यूँ मिरी शक्ल पहन लेता है छुपने के लिए
एक चेहरा कोई अपना भी खुदा का होता
-बे-सबब मुस्कुरा रहा है चाँद
कोई साजिश छुपा रहा है चाँद
जाने किस की गली से निकला है
झेंपा झेंपा सा आ रहा है चाँद
कितना गाजा लगाया है मुँह पर
धूल ही धूल उड़ा रहा है चाँद
कैसा बैठा है छुप के पत्तों में
बागबाँ को सता रहा है चाँद
सीधा-सादा उफुक से निकला था
सर पे अब चढ़ता जा रहा है चाँद
छू के देखा तो गर्म था माथा
धूप में खेलता रहा है चाँद
-हवा के सींग न पकड़ो खदेड़ देती है
जमीं से पेड़ों के टाँके उधेड़ देती है
मैं चुप कराता हूँ हर शब उमडती बारिश को
मगर ये रोज गई बात छेड़ देती है
जमीं सा दूसरा कोई सखी कहाँ होगा
जरा सा बीज उठा ले तो पेड़ देती है
रुंधे गले की दुआओं से भी नहीं खुलता
दर-ए-हयात जिसे मौत भेड़ देती है
पढ़ें:गुलजार ने इस टॉप एक्ट्रेस से की थी लव मैरेज, शादी के एक साल बाद ही इस वजह से रहने लगे अलग