फिल्म निर्माता और अभिनेता शिवकुमार (75 वर्ष) रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। शिवकुमार पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। वह अलीगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती थे, जहां रविवार की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
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उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव देदामई में किया गया, जिसमें राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित लोगों ने भाग लिया। शिवकुमार का 12 जनवरी जन्म 1942 में अतरौली क्षेत्र के बेंबीपुर में हुआ था।
साधारण किसान परिवार में जन्मे इनके पिता का नाम ओमप्रकाश पाठक था, लेकिन नाना के कोई संतान नहीं होने के कारण वह परिवार सहित सासनी क्षेत्र के गांव देदामई में आकर बस गए थे। शिवकुमार डाइबिटीज के पुराने मरीज थे।
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वर्तमान में गठिया रोग से भी पीड़ित थे। शनिवार को उन्हें अलीगढ़ के विष्णुपुरी स्थित जीवन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहां उन्हें आईसीयू में रखा गया था। शिवकुमार को सांस लेने में परेशानी हो रही थी।
इनका पालन-पोषण एवं शिक्षा सासनी क्षेत्र के गांव देदामई में हुई थी। शिवकुमार के दो छोटे भाई रामकुमार पाठक और नरेंद्र पाठक हैं और उनकी दो बहनें रमा और शारदा थीं। बहन रमा का देहांत हो चुका है।
बहन शारदा ने फिल्म जगत में उनके साथ डिजायनर का काम किया है। शिवकुमार की ससुराल हाथरस जंक्शन के गांव पवलोई में थी। उनकी पत्नी सुमन पाठक से दो जुड़वां पुत्र राम पाठक एवं लखन पाठक हैं।
दोनो पुत्र सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। शिवकुमार के शव को मुखाग्नि उनके छोटे पुत्र लखन पाठक ने दी। शिवकुमार का वर्तमान निवास फरीदाबाद के ग्रीन फील्ड में है।
उनकी शवयात्रा में उनके दोनो भाई, बहन एवं ग्रामीणों के अलावा पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सतीशचंद्र शर्मा और स्थानीय कांग्रेसी सुरेश चंद्र शर्मा, हरीशंकर नेताजी, विधायक सदर हरीशंकर माहौर, चेयरमैन हाथरस आशीष शर्मा, पूर्व बसपा प्रत्याशी बृजमोहन राही भी शामिल हुए।
शिवकुमार ने 1960 के दशक में फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। गांव के रामनिवास शर्मा फिल्म क्षेत्र में उनके साथ कदम से कदम मिलाकर रहे। उन्होंने 1965 में फिल्मी सफर की शुरुआत की। सबसे पहली फिल्म पूनम की रात में वह सहायक अभिनेता रहे।
इसके बाद उन्होंने कांच की चूड़ियां, महुआ, महफिल, मजबूर, हवस, हिमालय से ऊंचा, महाबदमाश, दोस्त और दुश्मन, हम, तुम और वो, अहिंसा, माटी बलदान की, मिट्टी और सोना, जय शाकंभरी मां, लल्लूराम, बाल ब्रह्मचारी, कृष्णा तेरे देश में, रॉकी, बृजभूमि आदि फिल्मों में बतौर अभिनेता और निदेशक काम किया।
1982 में बृजभूमि उनकी पहली फिल्म थी, जिसके वह खुद निर्देशक रहे। छोटे परदे पर भी शिवकुमार ने चर्चित सीरियल मशाल, तारा और पीढ़ियां में भी अभिनय किया है। शिवकुमार की अंतिम इच्छा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार ग्राम देदामई में किया गया।