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LS Polls: गहलोत अमेठी में प्रचार के लिए पायलट को बुलाएंगे या नहीं? हाई प्रोफाइल सीट पर गुटबाजी की ये है वजह?

Wed, 15 May 2024 06:09 PM IST
शिव शरण शुक्ला डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

राजस्थान के इन दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से शीत युद्ध जारी है। लोकसभा चुनाव के दौरान जालोर सीट पर प्रचार के लिए बुलाने या नहीं आने को लेकर दोनों के बीच वार पलटवार का दौर चल रहा है। लेकिन अब ये दोनों नेता यूपी में अगल बगल की सीट अमेठी-रायबरेली पर चुनाव प्रचार करते नजर आ रहे हैं।
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अमेठी और रायबरेली की सियासत में कौन किस पर भारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश की अमेठी और रायबरेली लोकसभा सीट पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। दोनों ही सीटों पर 20 मई को मतदान होने जा रहा है। कांग्रेस ने अमेठी में जहां राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत को जिम्मेदारी दी है। जबकि रायबरेली में राहुल गांधी के लिए पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने भी मोर्चा संभाल लिया है। अमेठी सीट के ऑब्जर्वर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हैं। गहलोत ने राजस्थान की जालोर-सिरोही लोकसभा सीट पर सचिन पायलट को प्रचार के लिए नहीं बुलाया था। इस सीट से गहलोत के बेटे वैभव चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में अब राजनीतिक गलियारों में बार बार ये सवाल उठ रहा है कि क्या गहलोत पायलट को प्रचार के लिए अमेठी बुलाएंगे या नहीं?

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असल में राजस्थान के इन दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से शीत युद्ध जारी है। लोकसभा चुनाव के दौरान जालोर सीट पर प्रचार के लिए बुलाने या नहीं आने को लेकर दोनों के बीच वार पलटवार का दौर चल रहा है। लेकिन अब ये दोनों नेता यूपी में अगल बगल की सीट (अमेठी-रायबरेली) पर चुनाव प्रचार करते नजर आ रहे हैं। दरअसल, सचिन पायलट का रायबरेली सीट पर राहुल गांधी के लिए चुनाव प्रचार करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले सचिन पायलट वायनाड की सीट पर भी राहुल गांधी के लिए चुनावी जनसभाएं कर चुके हैं। राहुल गांधी ने एक बार फिर से उन्हें रायबरेली का जिम्मा सौंप कर उन पर अपना भरोसा जताया है। इन दोनों नेताओं के अलावा राजस्थान के करीब दो दर्जन नेता अमेठी और यूपी की अलग अलग सीटों पर चुनावी प्रचार में जुटे हुए हैं।

कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेताओं का कहना है कि अब तक उत्तर प्रदेश रायबरेली सीट से कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी लगातार चुनाव जीतती आ रही थीं। उन्हें अपने चुनाव प्रचार के लिए दूसरे नेताओं की जरूरत नहीं पड़ती थी। लेकिन अब उनकी जगह राहुल गांधी मैदान में हैं। राहुल पहली बार रायबरेली से चुनाव लड़ रहे हैं। इसलिए कांग्रेस के सभी राष्ट्रीय स्तर के नेता अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में डटे हुए हैं। रायबरेली में युवाओं को साधने के लिए सचिन पायलट को मैदान में उतारा गया है। सचिन के पिता स्व. राजेश पायलट रायबरेली सीट पर संजय गांधी के प्रचार के लिए पहुंचे थे।
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सचिन पायलट ने वायनाड में भी प्रचार के लिए पहुंचे थे। इसके बाद पायलट को अन्य राज्यों में चुनावी प्रचार का जिम्मा दिया गया था। सचिन 18 मई तक कई सभाओं को संबोधित करेंगे। पायलट 14 मई को रायबरेली में चार सभाओं को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने भाजपा पर जमकर निशाना साधा था। पायलट ने राहुल गांधी की जीत को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा कि एकतरफा चुनाव रायबरेली में है। राहुल गांधी रायबरेली सीट से रिकॉर्ड मतों से जीतेंगे। न केवल रायबरेली में बल्कि पूरे प्रदेश में इंडिया गठबंधन को राहुल गांधी के चुनाव लड़ने से मजबूती मिल रही है। रायबरेली की जनता मन बनाकर बैठी है कि राहुल गांधी को जिताना है।

दोनों नेताओं की साख सवाल बनीं ये दो सीटें 
राजस्थान के सियासी गलियारों में चर्चा है कि यूपी की दो सीटें अमेठी और रायबरेली गहलोत और पायलट की साख का सवाल बन गई हैं। अशोक गहलोत अमेठी सीट के लिए चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हैं। वहीं रायबरेली की सीट पर सचिन पायलट मोर्चा संभाले हुए हैं। वे अगले दो-तीन दिन रायबरेली सीट पर चुनावी रणनीति बनाने में अपना योगदान देंगे। सचिन पायलट और अशोक गहलोत दोनों ही राजस्थान के दिग्गज नेताओं में शामिल हैं। गहलोत अमेठी तो पायलट रायबरेली में जनसभाएं कर रहे हैं। ऐसे में चर्चा है कि अगर यूपी की रायबरेली सीट और अमेठी सीट पर कांग्रेस हार जाती है, तो दोनों नेताओं का सियासी भविष्य संकट में आ सकता है।

पायलट-गहलोत के बची अब इस मुद्दे को लेकर मचा है बवाल 
राजस्थान में लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुका है। 25 लोकसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान कराया जा चुका है, अब रिजल्ट का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, चुनाव के बाद भी राजस्थान में सियासत कम होने का नाम नहीं ले रही है। दूसरे चरण में जालोर-सिरोही लोकसभा सीट पर मतदान 26 अप्रैल को हुआ था। इस सीट पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत कांग्रेस के उम्मीदवार है। ऐसे में अशोक गहलोत ने बेटे को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। हालांकि, बेटे वैभव के प्रचार के लिए सचिन पायलट को जालोर सिरोही नहीं बुलाया गया, इस पर राजनीति तेज हो गई है।

सचिन पायलट ने हाल ही में एक बयान में जालोर सिरोही सीट पर प्रचार न करने को लेकर कहा था कि उन्हें बुलाया नहीं गया था। इसके बाद से सियासी गलियारों में इस बयान दोनों के बीच की कलह फिर सामने आई है। इस बयान पर अब अशोक गहलोत की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। गहलोत का कहना है कि, यह अनावश्यक मुद्दा बनता है या कई बार बनाया जाता है। चुनाव के वक्त किसी को ऐसे कमेंट नहीं करने चाहिए। ऐसी बेवकूफी भी नहीं करनी चाहिए कि मुझे बुलाया नहीं गया। मैं गया नहीं। इसका ऐसा कोई मतलब नहीं होता है। वो बयान भी नहीं देना चाहिए था। उस बयान की जरूरत नहीं थी।

गहलोत ने कहा- प्रियंका गांधी वहां (जालोर-सिरोही) पर आई थीं। सचिन पायलट साथ आते, तो कोई दिक्कत नहीं थी। सब उनका वेलकम करते। चुनाव में अब बहुत कम टाइम मिलता है। मुझे जयपुर ग्रामीण से कांग्रेस के युवा उम्मीदवार अनिल चोपड़ा ने प्रचार के लिए बुलाया था। मेरे ओएसडी से उनकी बात हुई थी। मेरा प्रोग्राम नहीं बन पाया था। अब मैं यह बयान दूं कि मैं अनिल चोपड़ा के यहां जाना चाहता था, मुझे इनवाइट नहीं किया। यह अच्छी बात नहीं। इससे पब्लिक में गलत मैसेज जाता है कि गहलोत क्यों नहीं आए या क्यों नहीं बुलाए गए। अनावश्यक उम्मीदवार को नुकसान होता है। गहलोत ने कहा कि चुनाव में कभी इस तरह नहीं बोलना चाहिए। चुनाव में कोई बुलाता है, कोई नहीं बुलाता है। सब अपने समीकरण देखते हैं। हर उम्मीदवार अपने हिसाब से प्रचार के लिए नेताओं को बुलाता है। कांग्रेस के कंट्रोल रूम में रिक्वेस्ट करता है। यह मुद्दा नहीं होना चाहिए।

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