कांग्रेस से निष्काषित संजय निरुपम एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। मुख्यमंत्री शिंदे की उपस्थिति में उन्होंने शिवसेना की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी बयानों के चलते उन्हें छह वर्षों के लिए निष्काषित किया था।
मुंबई उत्तर पश्चिम सीट कांग्रेस की ओर से शिवसेना यूबीटी को सौंपे जाने से थे नाराज
कहा जा रहा था कि निरुपम कांग्रेस के टिकट पर मुंबई उत्तर-पश्चिम लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन एमवीए सहयोगियों के बीच सीट-बंटवारे के समझौते के तहत यह सीट शिवसेना (यूबीटी) की झोली में चली गई। मूल रूप से बिहार के रहने वाले निरुपम ने 1990 के दशक में पत्रकारिता के जरिए राजनीति में प्रवेश किया था। वह अविभाजित शिवसेना के हिंदी मुखपत्र 'दोपहर का सामना' के संपादक बने। उनके काम से प्रभावित होकर शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने उन्हें 1996 में राज्यसभा भेजा। निरुपम उस समय शिवसेना के फायरब्रांड चेहरे के रूप में उभरे। उस समय शिवसेना मुंबई के उत्तर भारतीय मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी। हालांकि, उन्हें तब झटका लगा जब 2005 में उन्हें राज्यसभा सदस्य का पद छोड़ने के लिए कहा गया।
बाद में मतभेद सामने आए, जिसके बाद 2005 में निरुपम के शिवसेना छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने 2009 में राम नाइक को हराकर कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मुंबई उत्तर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता। हालांकि, 2014 में, उन्हें उसी निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के गोपाल शेट्टी के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा।