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Teachers Day: जानिए डॉ राधाकृष्णन के बारे में, जिनकी याद में मनाया जाता है शिक्षक दिवस

Sun, 05 Sep 2021 12:56 AM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

भारत के पहले उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को चिह्नित करने के लिए हर साल शिक्षक दिवस मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन 1988 में डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के थिरुथानी में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था।
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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन - फोटो : Facebook/All India Radio News
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विस्तार
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5 सितंबर को, भारत में हर साल शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत के पहले उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है। डॉ राधाकृष्णन 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति रहे थे। शिक्षा और शिक्षा के प्रतीक राधाकृष्णन एक प्रसिद्ध दार्शनिक, राजनेता होने के साथ-साथ एक शिक्षक भी थे। डॉ राधाकृष्णन को 20वीं सदी के महानतम विचारकों में से एक होने के साथ-साथ भारतीय समाज में पश्चिमी दर्शन का परिचय देने के लिए याद किया जाता है। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 में तमिलनाडु के थिरुथानी में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था।

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उन्हें कलकत्ता विश्वविद्यालय (सीयू) में मानसिक और नैतिक विज्ञान के किंग जॉर्ज 5 चेयर के दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था। विश्वविद्यालय के साथ उनका जुड़ाव 1921 से 1932 तक लगभग 12 वर्षों तक चला। विश्वविद्यालय में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने जून 1926 में ब्रिटिश साम्राज्य के विश्वविद्यालयों के कांग्रेस में और साथ ही सितंबर 1926 में यू.एस में हार्वर्ड विश्वविद्यालय में इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ फिलॉसफी में सीयू का प्रतिनिधित्व किया। डॉ राधाकृष्णन को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पूर्वी धर्म और नैतिकता के स्पैल्डिंग प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था। यह पद विशेष रूप से एचएन स्पैल्डिंग द्वारा 1936 में बनाया गया था क्योंकि वे राधाकृष्णन के लंदन में व्याख्यान के बाद प्रभावित हुए थे, और उनके व्यक्तित्व से भी प्रभावित थे। 

राधाकृष्णन को साहित्य में नोबेल पुरस्कार के लिए 16 बार और नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 11 बार नामांकित किया गया था। उनके छात्रों द्वारा उनकी बहुत प्रशंसा और सम्मान किया गया था। 1921 में, जब वे मैसूर विश्वविद्यालय से मैसूर रेलवे स्टेशन जा रहे थे, तो उनके छात्रों ने उन्हें गंतव्य तक ले जाने के लिए फूलों से सजी गाड़ी की व्यवस्था की थी। इस गाड़ी को छात्रों ने खुद खींचा था। उपराष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, राधाकृष्णन राज्यसभा (उच्च सदन) सत्रों के प्रभारी थे। जब भी सत्र के दौरान गरमागरम बातचीत होती, राधाकृष्णन उत्तेजित श्रोताओं को शांत करने के लिए संस्कृत क्लासिक्स के नारे या बाइबिल के उद्धरण उद्धृत करते थे।
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संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए, डॉ राधाकृष्णन 1948 में यूनेस्को के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष चुने गए। डॉ राधाकृष्णन ने मैसूर विश्वविद्यालय से लेकर कलकत्ता विश्वविद्यालय तक विभिन्न कॉलेजों में पढ़ाया। 
 
16 अप्रैल, 1975 को चेन्नई में उनका निधन हो गया।
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