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सम्मान: दो भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिकों को मिला सर्वोच्च वैज्ञानिक पुरस्कार, मानवता भलाई में किया था ये कारनामा

Wed, 25 Oct 2023 12:32 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

America-India: अमेरिका के राष्ट्रपति ने दो भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिकों को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अमेरिका के सर्वोच्च वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया है। आइए जानते हैं आखिर इन वैज्ञनिकों ने ऐसा क्या किया था।
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Joe Biden - फोटो : Social Media
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विस्तार
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America: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने दो भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिकों - अशोक गाडगिल और सुब्रा सुरेश को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए देश के सर्वोच्च वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया है।

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दुनिया को जीवन-निर्वाह संसाधन प्रदान करने के लिए मंगलवार को यूसी बर्कले में सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग के प्रोफेसर एमेरिटस गाडगिल को प्रौद्योगिकी और नवाचार (Technology and Innovation) के लिए प्रतिष्ठित व्हाइट हाउस नेशनल मेडल प्रदान किया।

व्हाइट हाउस नेशनल मेडल फॉर टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन 12 लोगों को दिया गया, जिनमें से गाडगिल भी एक थे। यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मकता और जीवन की गुणवत्ता में स्थायी योगदान दिया है और देश को तकनीकी रूप से मजबूत करने में मदद की है।
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ब्राउन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में प्रोफेसर सुरेश को बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग, भौतिक विज्ञान और जीवन विज्ञान में रिसर्च के लिए और विशेष रूप से सामग्री विज्ञान के अध्ययन और अन्य विषयों में इसके अनुप्रयोग को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान पदक से सम्मानित किया गया था।

गाडगिल ने विकासशील दुनिया की कुछ सबसे कठिन समस्याओं के लिए कम लागत वाले समाधान विकसित किए हैं, जिनमें सुरक्षित पेयजल तकनीक, ऊर्जा-कुशल स्टोव और कुशल विद्युत प्रकाश व्यवस्था को किफायती बनाने के तरीके शामिल हैं।

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अब तक इतने पदक मिल चुके

उनकी परियोजनाओं ने 100 मिलियन से अधिक लोगों की मदद की है। 
गाडगिल का पुरस्कार कुल मिलाकर 17वां राष्ट्रीय पदक और प्रौद्योगिकी और नवाचार का दूसरा राष्ट्रीय पदक है जो बर्कले लैब के शोधकर्ताओं ने अर्जित किया है।

व्हाइट हाउस ने कहा कि गाडगिल को "दुनिया भर की कम्युनिटीज को जीवन-निर्वाह संसाधन प्रदान करने के लिए पदक प्रदान किया गया है। उनकी नवीन, सस्ती टेक्नोलॉजी पीने के पानी से लेकर ईंधन-कुशल कुकस्टोव तक की गहन जरूरतों को पूरा करने में मदद करती हैं। उनका काम एक विश्वास से प्रेरित है।"

गाडगिल के बारे में

गाडगिल ने बॉम्बे विश्वविद्यालय (अब मुंबई), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर से भौतिकी में डिग्री हासिल की और अपनी पीएच.डी. यूसी बर्कले से की है। 1980 में लॉरेंस बर्कले नेशनल लेबोरेटरी (बर्कले लैब) में शामिल हो गए और इस साल की शुरुआत में एक संकाय वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में सेवानिवृत्त हुए; वो अब बर्कले लैब से सेवानिवृत्त हो गए हैं।
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सुरेश के बारे में

ब्राउन यूनिवर्सिटी के एक बयान के अनुसार, सुरेश ने कहा, "यह बहुत संतोषजनक है।" उन्होंने कहा कि उन्हें इस सम्मान पर विशेष गर्व है। 1956 में भारत में जन्मे, सुरेश ने 15 साल की उम्र में हाई स्कूल से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 25 साल की उम्र में उन्होंने स्नातक की डिग्री, मास्टर डिग्री और पीएचडी हासिल कर ली।

सुरेश 1983 में इंजीनियरिंग संकाय के सबसे कम उम्र के सदस्य के रूप में ब्राउन विश्वविद्यालय में संकाय सदस्य (Faculty Member) बने। ब्राउन में 10 वर्षों के बाद, सुरेश नेशनल साइंस फाउंडेशन (एनएसएफ) का नेतृत्व करने वाले पहले एशियाई मूल के अमेरिकी बन गए, और तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नामित किए जाने के बाद उन्होंने इसके 13वें निदेशक के रूप में कार्य किया।
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