अब तक इतने पदक मिल चुके
उनकी परियोजनाओं ने 100 मिलियन से अधिक लोगों की मदद की है।
गाडगिल का पुरस्कार कुल मिलाकर 17वां राष्ट्रीय पदक और प्रौद्योगिकी और नवाचार का दूसरा राष्ट्रीय पदक है जो बर्कले लैब के शोधकर्ताओं ने अर्जित किया है।
व्हाइट हाउस ने कहा कि गाडगिल को "दुनिया भर की कम्युनिटीज को जीवन-निर्वाह संसाधन प्रदान करने के लिए पदक प्रदान किया गया है। उनकी नवीन, सस्ती टेक्नोलॉजी पीने के पानी से लेकर ईंधन-कुशल कुकस्टोव तक की गहन जरूरतों को पूरा करने में मदद करती हैं। उनका काम एक विश्वास से प्रेरित है।"
गाडगिल के बारे में
गाडगिल ने बॉम्बे विश्वविद्यालय (अब मुंबई), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर से भौतिकी में डिग्री हासिल की और अपनी पीएच.डी. यूसी बर्कले से की है। 1980 में लॉरेंस बर्कले नेशनल लेबोरेटरी (बर्कले लैब) में शामिल हो गए और इस साल की शुरुआत में एक संकाय वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में सेवानिवृत्त हुए; वो अब बर्कले लैब से सेवानिवृत्त हो गए हैं।
सुरेश के बारे में
ब्राउन यूनिवर्सिटी के एक बयान के अनुसार, सुरेश ने कहा, "यह बहुत संतोषजनक है।" उन्होंने कहा कि उन्हें इस सम्मान पर विशेष गर्व है। 1956 में भारत में जन्मे, सुरेश ने 15 साल की उम्र में हाई स्कूल से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 25 साल की उम्र में उन्होंने स्नातक की डिग्री, मास्टर डिग्री और पीएचडी हासिल कर ली।
सुरेश 1983 में इंजीनियरिंग संकाय के सबसे कम उम्र के सदस्य के रूप में ब्राउन विश्वविद्यालय में संकाय सदस्य (Faculty Member) बने। ब्राउन में 10 वर्षों के बाद, सुरेश नेशनल साइंस फाउंडेशन (एनएसएफ) का नेतृत्व करने वाले पहले एशियाई मूल के अमेरिकी बन गए, और तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नामित किए जाने के बाद उन्होंने इसके 13वें निदेशक के रूप में कार्य किया।