हाउस पैनल के सूत्र ने कहा है कि रिपोर्ट लगभग अंतिम चरण पर थी, लेकिन बाद में कुछ लोगों ने सुझाव देने की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। दरअसल, दूसरी लहर के कारण कई लोग प्रभावित हुए और इसमें अपना योगदान नहीं दे पाए। इसलिए हाउस पैनल ने समय सीमा बढ़ाकर 15 जुलाई कर दी है। हम नहीं चाहते कि कोई भी इस महत्व की कवायद में हिस्सा लेने से वंचित रहे।
राज्य सभा सचिवालय (समिति अनुभाग) द्वारा पहले जारी एक नोट में यह उल्लेख किया गया था कि स्कूली पाठ्य पुस्तकों में से हमारे राष्ट्रीय नायकों के बारे में अनैतिहासिक तथ्यों और विकृतियों के संदर्भों को हटाना", "भारतीय इतिहास की सभी अवधियों के समान या आनुपातिक संदर्भ" सुनिश्चित करना और "गार्गी, मैत्रेयी या शासक जैसे झांसी की रानी, राम चन्नम्मा, चांद बीबी और ज़लकारी बाई सहित महान ऐतिहासिक महिला नायकों की भूमिका पर प्रकाश डालना शामिल है।