इस पात्रता परीक्षा के सफल जिन छात्रों की अभी तक मास्टर डिग्री पूरी नहीं हो पाई है या फिर नतीजे में देरी हो रही है, उन्हें अतिरिक्त समय देने का फैसला लिया गया है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दिसंबर 2018 और जून 2019 नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) पास छात्रों को बड़ी राहत दी है।
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आयोग ने कहा कि जिन छात्रों ने ये दोनों परीक्षाएं पास की हैं लेकिन अपनी मास्टर डिग्री अभी तक पूरी नहीं कर पाए हैं, उन्हें 2022 तक डिग्री पूरी करनी होगी। आयोग ने कोरोना महामारी को ध्यान में रखे हुए अतिरिक्त समय देने का फैसला लिया है।
यूजीसी के सचिव प्रो. रजनीश जैन ने इस संबंध में सभी राज्यों और विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता परीक्षा दिसंबर 2018 और जून 2019 के सफल छात्रों को यह राहत दी जा रही है।
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इस पात्रता परीक्षा के सफल जिन छात्रों की अभी तक मास्टर डिग्री पूरी नहीं हो पाई है या फिर नतीजे में देरी हो रही है, उन्हें अतिरिक्त समय देने का फैसला लिया गया है।
इसके तहत नेट की दिसंबर 2018 के पास छात्रों को 30 जून 2022 और जून 2019 के सफल छात्रों को 31 दिसंबर 2022 तक अपनी मास्टर डिग्री पूरी करनी होगी। यदि इन दोनों परीक्षाओं के सफल छात्रों का परिणाम महामारी के चलते जारी नहीं हो पाया है तो वे प्रोविजनल रूप से आवेदन कर सकते हैं।