इसके तहत, प्री-यूनिवर्सिटी एजुकेशन डिपार्टमेंट ने 2022-23 शैक्षणिक वर्ष से प्री-यूनिवर्सिटी (पीयू) कॉलेज के छात्रों के लिए कॉलेज विकास समिति द्वारा निर्धारित यूनिफॉर्म अनिवार्य कर दी है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि कॉलेज विकास समिति या प्रबंधन द्वारा कोई यूनिफॉर्म निर्धारित नहीं की जाती है, तो छात्रों को एक ऐसे परिधान पहनने चाहिए जो समानता और एकता बनाए रखे, और जो शांति व सार्वजनिक व्यवस्था में खलल न डाले।
सरकार के यह निर्देश शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए जारी एडमिशन गाइडलाइन में दिया गया है। इसमें उच्च न्यायालय द्वारा यूनिफॉर्म पर सरकारी आदेश को बरकरार रखने के आदेश का हवाला दिया गया था। हिजाब विवाद के मद्देनजर, कर्नाटक सरकार ने फरवरी में एक आदेश जारी किया था, जिसमें राज्य भर के स्कूल और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में छात्रों के लिए संस्थान के द्वारा निर्धारित यूनिफॉर्म या निजी संस्थानों में प्रबंधन द्वारा निर्धारित यूनिफॉर्म को अनिवार्य कर दिया गया था।
गौरतलब है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 15 मार्च को मुस्लिम छात्रों के एक समूह द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें कक्षाओं के अंदर हिजाब पहनने की अनुमति मांगी गई थी। फैसले में कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की अदालत की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि स्कूल की यूनिफॉर्म तय करना केवल एक उचित प्रबंध और संवैधानिक तौर पर स्वीकार्य है, इस पर छात्र आपत्ति नहीं जता सकते हैं।