यूपीएससी सीएसई प्रीलम्स 2021 के लिए केवल कुछ ही महीने शेष हैं। ऐसे में तैयारी को और मजबूत करना व रिवीजन करना ही सफलता की कुंजी होती है। इसलिए सिलेक्टिव रिवीजन को संभव बनाने के लिए यह प्रत्येक गलत जवाब और बिना जवाब वाले प्रश्नों के उत्तर में उम्मीदवारों को उस चैप्टर नंबर की ओर इशारा करता है, जिसे उम्मीदवार को पढ़ने की आवश्यकता है।
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बता दें कि कुमार ने साल 2000 में यूपीएससी इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस को पहली बार में ही पास कर लिया था। कुमार कहते हैं कि एक पारंपरिक टेस्ट सीरीज में प्रीलिम्स के स्टैंडर्ड्स पर खरे उतरने पर ही ध्यान केंद्रित किया जाता है। वहीं, उम्मीदवारों के सीखने का पैटर्न, चुनौतियां, ताकत / कमजोरी पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जाता है। जबकि एक पारंपरिक टेस्ट सीरीज का स्कोर केवल इस बात की ओर इशारा करती है कि उम्मीदवार का प्रदर्शन पूर्ण रूप से अच्छा/औसत/खराब रहा।
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