बोहर राजेंद्र सिंह ने हजारी प्रसाद द्विवेदी, काका कालेलकर, मैथिली शरण गुप्त और सेठ गोविंद दास के साथ मिलकर हिंदी भाषा को देश की आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया। इसके बाद सन 1949 में बोहर राजेंद्र सिंह के जन्मदिन 14 सितंबर पर भारत की संविधान सभा ने हिंदी को नवगठित राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में अपना लिया। हालांकि, तब केवल निर्णय को स्वीकारा गया था, क्योंकि भारतीय संविधान का एक हिस्सा तो 26 जनवरी 1950 को बना। इसके तीन साल बाद यानी 1953 में राजेंद्र सिंह के जन्मदिन के अवसर पर ही पहला हिंदी दिवस मनाया गया। तब से लेकर अब तक तकरीबन 68 साल से 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जा रहा है।
भारत में स्कूल और कॉलेज इस दिन हिंदी में साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आयोजित करते हैं, जिनमें सभी छात्र हिस्सा लेते हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने का फैसला किया था। अधिकांश शैक्षणिक संस्थान कविता, निबंध और पाठ प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं और छात्रों को हिस्सा लेने, भाषा का जश्न मनाने और उस पर गर्व करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। यादगार दिन को मनाने के लिए आप कई साहित्यिक गतिविधियों के साथ-साथ समारोह भी देख सकते हैं।