8.74 लाख से अधिक छात्र हो रहे शामिल
उच्च न्यायालय ने कक्षाओं के अंदर हिजाब और बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने फैसला सुनाया था कि हिजाब एक जरूरी धार्मिक प्रथा नहीं है और सभी को यूनिफॉर्म पहनने के नियम का पालन करना चाहिए। राज्य में सोमवार को 3,440 केंद्रों में 48,000 से अधिक परीक्षा कक्षों में कक्षा 10वीं की परीक्षाएं शुरू हुई हैं। इनमें बैठने के लिए 8.74 लाख से अधिक छात्रों ने नामांकन किया था। 10वीं की अंतिम परीक्षा 11 अप्रैल को होनी है।
मंत्री बोले- पुलिस कार्रवाई करने को स्वतंत्र
कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने चेतावनी देते हुए कहा कि हिजाब और ड्रेस कोड संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हम इससे समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी को कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करना चाहिए। छात्राओं को बगैर हिजाब के परीक्षा में शामिल होना चाहिए। वहीं, राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा कि पुलिस स्वाभाविक रूप से सरकारी नियमों का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि कोई भी विद्यार्थी ऐसी स्थिति का अवसर नहीं आने देंगे।
हुबली और बगलाकोट में हुई तकरार
बोर्ड परीक्षा के पहले दिन हिजाब को लेकर कर्नाटक के दो जिलों में अलग-अलग मामले देखने को मिले। जहां हुबली जिले के एक परीक्षा केंद्र पर हिजाब और बुर्का पहनकर परीक्षा देने आई छात्रा को वापस लौटा दिया गया था। हालांकि, यूनिफॉर्म पहनकर वापस आने के लिए उसे कुछ अतिरिक्त समय दिया गया था, जिसके बाद वह परीक्षा में शामिल हुई। वहीं, बगलाकोट जिले में एक परीक्षा केंद्र पर प्रवेश नहीं दिए जाने के बाद छात्रा ने परीक्षा का बहिष्कार किया।