एमपी इंटर कॉलेज प्रयागराज के प्रिंसिपल महेश शंकर श्रीवास्तव का कहना है कि कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले वर्ष भी कक्षा ग्यारहवीं के छात्रों को प्रोन्नति प्रदान की गई थी। वहीं तीसरी लहर में बच्चों के स्वास्थ्य को खतरा होने की आशंकाओं की वजह से बारहवीं बोर्ड को भी रद्द करने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में बारहवीं बोर्ड का परिणाम दसवीं बोर्ड में प्राप्त अंकों के आधार पर होना चाहिए। क्योंकि यही वो परीक्षा है जिसे बच्चों ने पेन पेपर मोड में दिया है और पूरे साल भर इसकी तैयारी भी की है।
केंद्रीय विद्यालय भोपाल की प्रिंसिपल ऋतु पल्लवी कहती हैं कि सीबीएसई के साथ-साथ राज्यों ने भी कक्षा बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। यह महामारी का दौर है। देश में ही नहीं पूरे विश्व में स्थिति समान है। ऐसे अभूतपूर्व स्थितियों में विश्वविद्यालयों को भी अपने दाखिले की प्रक्रिया में बदलाव करने पड़ेंगे। उन्हें दाखिले के लिए इस साल कटऑफ को कम करना पड़ेगा।
मॉडर्न पब्लिक स्कूल दिल्ली की प्रिंसिपल अलका कपूर बताती हैं कि यह बात प्रधानमंत्री और सीबीएसई द्वारा स्पष्ट कर दी गई है कि स्थिति सामान्य होने पर सीबीएसई द्वारा बोर्ड परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। अगर कोई विद्यार्थी आंतरिक मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं है तो वह बोर्ड परीक्षा देने का विकल्प चुन सकता है।