दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में युवा अपनी-अपनी पाठशाला चला रहे हैं। यहां हाशिए पर पड़े गरीब बच्चों की जिंदगी में ज्ञान की रोशनी भरी जाती है। कोशिश यही रहती है कि इनकी जिंदगी का हर दिन दिवाली सरीखा हो। प्रगति मैदान में ‘सबकी पाठशाला’ चलती है तो आईआईटी दिल्ली व कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर के पास ‘बेटी की पाठशाला’। सबकी पाठशाला को अलिशा नाम की एक युवती ने लाइब्रेरी दी है। अलिशा अमेरिका में पढ़ाई करती हैं और उसने ऑनलाइन क्लास में पढ़ाने से हुई कमाई को लाइब्रेरी में लगा दिया।
सबकी पाठशाला प्रगति मैैदान के सामने की झुग्गी में नीतू सिंह चलाती है। इस दिवाली सबकी पाठशाला में यूएसए में पढ़ाई कर रही अलिशा ने सहयोग किया और लाइब्रेरी ऑन व्हील को बच्चों की पढ़ाई के लिए दिया है। बकौल अलिशा, कोविड-19 की वजह से पूरे अमेरिका में लॉकडाउन था। उस दौरान ऑनलाइन लोगों को शिक्षित करने का काम मिला था। इससे कुछ धन भी अर्जित हुए। चूंकि दिल्ली में रहने वाले पिता मधुर्वरशि व मां शमा लॉकडाउन के दौरान भी पढ़ाई का अमेरिका में पढ़ाई का खर्च भेजते रहे। लिहाजा ऑनलाइन लोगों को शिक्षित करने से कुछ पैसा इकट्ठा हो गया था।
अलिशा का कहना है कि इस प्रयास में सीआईएसएफ के डिप्टी कमांडेट राकेश निखज का सहयोग मिला क्योंकि सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला कि निखज बच्चों को शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक लाइब्रेरी गोपालपुर के झुग्गी बस्ती के छात्रों को समर्पित किए है। ऐसे में इस प्रयास को बढ़ावा देना हर किसी का कर्तव्य बनता है। बच्चों को मिठाई बांटने के साथ ही हर कोई अगर ठान ले कि उन्हें एक किताब हाथ पकड़ा दे तो भारत का भविष्य बेहतर होगा और हर बच्चे की दीवाली खुशहाल होगी।
110 बच्चों के जीवन में भर रही ज्ञान की रोशनी
दिल्ली विश्वविद्यालय से 2019 की स्नातक निधि झा इस वक्त करीब 110 बच्चों के जीवन में ज्ञान की रोशनी भर रही हैं। इस वक्त आईआईटी दिल्ली फ्लाईओवर और कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर के नजदीक वह भीख मांगने वाले बच्चों के लिए बेटी की पाठशाला चलाती हैं। दोनों पाठशालाओं में करीब 110 बच्चे हर दिन दो से ढाई घंटे की पढ़ाई करते हैं। मजेदार बात यह है कि इसके खर्च का इंतजाम वह अपने दोस्तों व परिचितों से करती हैं और दोस्तों की मदद से पाठशाला भी चलाती हैं।
पढ़ाने के साथ निधि ने बच्चों के पेसिंल, कापी, किताब का तो इंतजाम किया ही है, उनकी सेहत तक का ख्याल रखने का जिम्मा उठा रखा है। निधि झा बताती हैं कि करीब ढाई साल पुरानी आईआईटी वाली पाठशाला लॉकडाउन के दौरान भी पूरी तरह बंद नहीं हुई थी। बीच-बीच में जाकर बच्चों की पढ़ाई का बंदोबस्त कर लिया जाता था। हनुमान मंदिर पर अभी एक महीने से पहले से पाठशाला शुरू की है। अपने काम को नियोजित करने के लिए बेटी फाउंडेशन का भी निर्माण किया है। 2018 में सशक्त बचपन, सशक्त देश प्रोजेक्ट के लिए इनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में भी शामिल किया गया है।