यमुना नदी प्रणाली के जलग्रहण क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली के कुछ हिस्से शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद पानी का बहाव बढ़ जाता है। बैराज से छोड़े गए पानी को राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंचने में आमतौर पर दो से तीन दिन लगते हैं।
पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद राजधानी में यमुना का जलस्तर चेतावनी के निशान (204.5 मीटर) के करीब पहुंच गया। इसके 26 सितंबर को पार कर जाने की आशंका जताई गई है। दिल्ली बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि जल स्तर सोमवार को रात 1 बजे चेतावनी के निशान को पार कर गया और सुबह 8 बजे तक 204.7 तक पहुंच गया। जब हरियाणा के यमुनानगर में हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ने की दर एक लाख क्यूसेक के निशान को पार कर जाती है तब दिल्ली में बाढ़ की चेतावनी दी जाती है।
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यमुना नदी के तट के पास निचले इलाकों और अन्य बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को खाली कराया जाता है। दिल्ली बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने रात आठ बजे करीब 45,352 क्यूसेक पानी छोड़ने की सूचना दी। एक क्यूसेक 28.32 लीटर प्रति सेकेंड के बराबर होता है। यमुना नदी प्रणाली के जलग्रहण क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली के कुछ हिस्से शामिल हैं।
आम तौर पर हथिनीकुंड बैराज में पानी छोड़ने की दर 352 क्यूसेक होती है। लेकिन जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद पानी का बहाव बढ़ जाता है। बैराज से छोड़े गए पानी को राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंचने में आमतौर पर दो से तीन दिन लगते हैं।
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प्रशासन ने अभी तक बाढ़ की चेतावनी जारी नहीं की
पूर्वी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट अनिल बांका ने कहा कि नदी के किनारे के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधान रहने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने कहा, "जलस्तर बुधवार तक 206 मीटर के स्तर को छूने का अनुमान है। 205.3 मीटर के खतरे के निशान को पार करने पर फूड अलर्ट जारी किया जाएगा। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तरी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है।दिल्ली में नदी के पास के निचले इलाकों को बाढ़ की चपेट में माना जाता है। यहां पर लगभग 37,000 लोगों के घर हैं। यमुना ने 12 अगस्त को 205.33 मीटर के खतरे के निशान को पार कर लिया था। जिसके बाद लगभग 7,000 लोगों को नदी के किनारे के निचले इलाकों से सुरक्षित निकाल लिया गया था।