हाई कोर्ट ने केद्र सरकार को कोविड महामारी के दौरान विदेशों में मारे गए भारतीय नागरिकों को बतौर मुआवजा अनुग्रह राशि का भुगतान करने की मांग याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश प्रवासी लीगल सेल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची के वकील ने अदालत से सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देश के मद्देनजर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संबंधित अधिकारियों के समक्ष नए सिरे से ज्ञापन देने की इजाजत मांगी।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के हालही में दिए आदेश का हवाला देते हुए कहा राष्ट्रीय प्राधिकरण को ऐसे मामलों में न्यूनतम मानकों को निर्धारित कर पीड़ितो को राहत प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने कहा शीर्ष अदालत ने रीपक कंसल बनाम भारत सरकार के मामले में मरने वालों के परिवार के सदस्यों को मुआवजे के भुगतान के लिए कहा था। वे कोविड -19 बीमारी से मरने वाले हो या कोविड 19 जटिलताओं के बाद के हो।
याची ने अदालत से आग्रह किया कि विदेशों में भारतीय मिशनों को उन भारतीय नागरिकों का उचित डेटा एकत्र करने और बनाए रखने के लिए निर्देश देने की मांग की थी, जो कोविड -19 के कारण विदेशों में मारे गए थे। उन्होंने कहा केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि भारत में कोविड-19 के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए प्रस्तावित कल्याण योजना का विस्तार विदेशों में रहने वाले नागरिकों तक किया जाए।
इसके अलावा यह भी आग्रह किया गया कि सरकार को पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत ऐसे भारतीय बच्चों को शामिल करना चाहिए, जिन्होंने विदेशों में कोविड -19 के कारण माता-पिता या कानूनी अभिभावक, दत्तक माता-पिता दोनों को खो दिए है।
पीठ ने केंद्र सरकार को इस याचिका को विषय पर लागू कानून, नियमों, विनियमों और सरकारी नीतियों के अनुसार बतौर एक ज्ञापन के रूप में विचार करने का निर्देश दिया है।